भारतनेट घोटाला-2:टाटा को लगी 29 करोड़ की पेनाल्टी विश्वनोई ने कर दी थी वापस

भारतनेट परियोजना फेस-2 में एक और खुलासा हुआ है। चिप्स ने समय पर काम न करने की वजह से टाटा पर 12% का जुर्माना लगाया था। हर बिल पर 12% राशि काटी जा रही थी। इसके तहत लगभग 28 करोड़ रुपए जुर्माना वसूल किया गया, लेकिन बाद में तत्कालीन चिप्स सीईओ समीर विश्वनोई ने उक्त जुर्माना राशि लौटा दी। इसके साथ ही अपने कार्यकाल में करीब 1400 करोड़ रुपए का भुगतान भी टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को कर दिया गया। इस दौरान एक नई शेल कंपनी खड़ी की गई। मार्च 2019 में बनीं गैलेक्सी सेनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (जीएसपीएल) को टाटा ने सितंबर तक 275 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया। जब दैनिक भास्कर ने टाटा और जीएसपीएल के बीच हुए एग्रीमेंट की कॉपी निकाली तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। 6 महीने पहले बनी इस कंपनी को 10 हजार किलोमीटर की लाइन बिछाने के का काम दिया गया था। करार में लिखा हुआ था कि कंपनी टाटा को चिप्स की पेनल्टी से बचाएगी। चिप्स को इसकी शिकायत भी मिली कि इस कंपनी ने कई अफसरों को पैसे बांटे हैं।
विधानसभा में भी दी गलत जानकारी
2 मार्च 2021 को विधानसभा में विधायक अजय चंद्राकर ने भारतनेट परियोजना से जुड़ा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि समय सीमा कितनी बार बढ़ाई गई और कंपनी पर कितनी पेनल्टी लगाई गई। जवाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि तीन बार समय सीमा बढ़ाई गई है। कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण टीपीएल पर जुर्माना लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जबकि तत्कालीन चिप्स सीईओ देव सेनापति ने 8 नवंबर को टाटा पर 200 करोड़ रुपए पेनल्टी लगाने का आदेश जारी किया और 28 करोड़ की पेनल्टी भी वसूल की गई थी। 10 करोड़ से बना सेंटर भी खाली नवा रायपुर के सीबीडी के 10वें फ्लोर पर 10 करोड़ रुपए से नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर बनाया गया है। यह सभी पंचायतों को लाइव देखने के लिए बनाया गया था। कहां नेटवर्क चल रहा है, कहां नहीं, यह इसी सेंटर पर नजर आता। दैनिक भास्कर की टीम जब यहां पहुंची तो सुरक्षाकर्मी ने बताया कि टाटा के लोग आज नहीं आए है। 2-4 लोग हैं, जो कभी-कभी आते हैं। बाकी यह पूरा परिसर खाली है। पंचायतों को लाइव देखने के बारे में पूछा तो उसने जवाब दिया कि यहां ऐसा कोई काम नहीं होता है। नियम तोड़कर भुगतान एमएसआई के नियमानुसार 100% सामान की डिलीवरी होने के बाद 50% राशि एडवांस जारी की जा सकती है। एक ब्लॉक का पूरा सामान आ जाएगा तो आपको 50% पैसा दे देंगे, बाकी काम पूर्ण होने के बाद जारी होगी। नियम को तोड़कर बिना सामान खरीदे ही एडवांस राशि दे दी गई। चिप्स ने 300 करोड़ रुपए से अधिक एडवांस पेमेंट कर दिया। ठेकेदारों का पैसा ले गई टाटा ने यहां काम करने के लिए पांच बड़े ठेकेदार भी रखे थे। पेनाल्टी कटने की वजह से टाटा इन ठेकेदारों के बिल में भी कई बार 70 प्रतिशत ही पेमेंट करता था। इन ठेकेदारों ने काम पूरा करने के बाद जब टाटा से पैसा मांगा तो वह टालमटोल करता रहा। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों के भी 100 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें एक-दो ठेकेदार कर्जे के नीचे दब गए हैं। तारीखों में समझें भारतनेट के खेल को 18 जुलाई 2018 में टाटा के चिप्स से कांट्रेक्ट में यह शर्त रखी गई कि पहले दो महीने नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर बनाएंगे। 10 महीने में हर माह 10 प्रतिशत पंचायतों तक फाइबर का काम पूरा करेंगे। ऐसा ना हुआ तो 12 प्रतिशत की पेनाल्टी लगाई जाएगी। 21 अक्टूबर 2019 को सीएस की बैठक में समय से काम न करने पर टाटा को पेनाल्टी लगाने का निर्णय लिया गया। तत्कालीन चिप्स सीईओ देव सेनापति ने 8 नवंबर को टाटा पर पेनल्टी लगाने का आदेश जारी किया। 28 अगस्त 2020 को तत्कालीन सीईओ समीर विश्वनोई ने पेनाल्टी वापस करने के साथ आगे भी किसी तरह जुर्माना न काटने के निर्देश दिए। इसके बाद हर बिल में शत प्रतिशत पेमेंट होता रहा।

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