22 जून को नागरिक आपूर्ति निगम (नान) का ड्राइवर मुन्नालाल पटेल गुढि़यारी सब्जी बाजार गया था। यहां उसकी जेब से किसी ने मोबाइल पार कर दिया। मोबाइल चोरी के एक घंटे के भीतर ही यूपीआई के जरिए मुन्नालाल के खाते से 99 हजार रुपए निकाल लिए गए। मुन्नालाल ने जब सिम ब्लॉक कराकर नया सिम लिया और नंबर चालू किया तब ठगी का पता चला। मुन्नालाल ने 9 जुलाई को केस दर्ज कराया। इसके बाद शुरू हुई मामले की जांच। ये एक तरह से नए तरीके का क्राइम था, जो पहले रायपुर में नहीं हुआ। ऐ से में पुलिस के आला अफसर भी इसे करते हुए हर एंगल से जांच कर रहे थे। सबसे पहले हमने उन खातों की जानकारी निकाली, जिसमें पैसा गया है। हमने 6 लेयर में पिछले 6 माह का ट्रांजेक्शन निकाला। उन खातों में लिंक मोबाइल नंबर की जानकारी निकाली गई और फिर लोकेशन। लंबी तकनीकी जांच के बाद क्राइम ब्रांच की 9 सदस्यीय टीम बनाई गई। टीम लीड करने की जिम्मेदारी मुझ पर थी। मैं टीम के साथ पं. बंगाल के 24 परगना पहुंचा। यहां पहुंचते ही हमने फिर तक तकनीकी जांच शुरू की। इसके बाद दो अलग-अलग टीम बनाकर चार दिनों तक कुरियर ब्वॉय के रूप में अलग-अलग इलाकों में पार्सल छोड़ने के नाम पर घूमते रहे। इसी दौरान एक आरोपी तक पहुंचे। तब वह ठगी का पैसा निकालने के लिए एटीएम गया था। हमारी टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसी तरह एक और टीम ने भी छापा मारकर एक आरोपी को दबोच लिया। इस बीच किसी ने अपहरण का हल्ला मचा दिया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। इसमें ज्यादातर महिलाएं थीं। हमने लोगों को बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस से हैं, आईडी भी दिखाए, लेकिन वो लोग झूमाझटकी करने लगे। किसी ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस के साथ हम थाने गए और दस्तावेज दिखाए। इसके बाद हम आरोपी को लेकर वहां से निकले। दोनों से हिरासत में ही पूछताछ शुरू की तो पता चला कि गिरोह के अन्य सदस्य झारखंड के साहेबगंज में है। यह बांग्लादेश का बॉर्डर है। टीम साहेबगंज पहुंचीं। यहां दोनों आरोपियों को पुलिस टीम के साथ होटल में रखा गया। शेष सदस्य प्राइवेट कंपनी के सर्वे ब्वॉय बनकर तीन दिनों तक आरोपियों की तलाश करते रहे। इस दौरान स्थानीय पुलिस की भी मदद ली गई। गिरोह इस तरह देता है घटना को अंजाम


