दो सौ बेड का अस्पताल बनकर तैयार पर डाॅक्टर कहां से आयेंगे सबसे बडा सवाल
वर्तमान में जिला अस्पताल में डाॅक्टरो की है भारी कमी
अनूपपुर। 15 अगस्त 2003 को अनूपपुर को जिले की सौगात मिली, उसके बाद धीरे-धीरे व्यवस्थाएं शुरू हुई। मूलभूत सुविधाओ के लिये लगातार जनप्रतिनिधियो द्वारा प्रयास किये जाने के बाद षिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क व पेयजल की व्यवस्था में सुधार आया। यहां पर जिला अस्पताल की स्वीकृति तो सालो पूर्व हो चुकी थी, लेकिन उसके निर्माण स्थल को लेकर जनप्रतिनिधियो में सामंजस्य न बनने के कारण देर होती गयी। ऐन-केन-प्रकारेण जिला अस्पताल के समीप नवीन जिला अस्पताल का निर्माण प्रारंभ हुआ, जो अब अपने पूर्णता की ओर है और वह साल 2024 में जिला प्रषासन को निर्माण एजेंसी के द्वारा कार्य पूर्ण कर सौंप दिया जायेगा। उसके बाद यहां जिले भर से आने वाले मरीजो का उपचार हो सकेगा। लेकिन मरीजो का उपचार करने वाले चिकित्सको की कमी बनी रहेगी, क्योंकि दिसंबर 2022 तक जिला अस्पताल में कुल विषेषज्ञ चिकित्सको सहित मेडिकल आॅफिसर के कुछ पद ही भरे हुये है और उससे दूने पद रिक्त हैं।
सामूहिक प्रयास से पूर्ण होगा कार्य
संकट काल में हरेक व्यक्ति उपचार के लिये सबसे पहले जिला अस्पताल पहंुचता है और इसका प्रमाण कोरोना काल में सबने देखा है जहां कि जिला अस्पताल में कम-बेसी उपकरणो की पूर्ति लोगो ने जन सहयोग के माध्यम से की है और कोरोना की जंग सीमित संसाधनो से पदस्थ चिकित्सको की तत्परता से जीती है। ऐसे में नवीन जिला अस्पताल जिला प्रषासन के सुपुर्द होते ही चिकित्सको के रिक्त पदो की पूर्ति की जा सके, इसके लिये सबको मिलकर प्रयास करना पडेगा तब जाकर जिला अस्पताल में हरेक रोग के विषेषज्ञ चिकित्सक पदस्थ हो सकेंगे और जिले वासियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
आक्सीजन की उपलब्धता पूरी
200 बिस्तरों के जिला अस्पताल के लिये आक्सीजन की कमी नही होगी उसकी वजह है कि कोरोना संकट काल में आक्सीजन की कमी को देखने के बाद मध्यप्रदेष सरकार के साथ ही केन्द्र सरकार के माध्यम से तीन यूनिट यहां पर स्थापित हो चुकी है और एक यूनिट पर कार्य चल रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅक्टर एस सी राय ने जानकारी देते हुये बताया कि हमारे यहां आक्सीजन की कमी नही होगी यह अनूपपुर वासियों के लिये अपने आप में गर्व का विषय है कि मरीजो को किसी भी स्थिति में आक्सीजन के बिना तडपना नही पडेगा।
चिकित्सको की कमी बड़ी समस्या
25 नवंबर की स्थिति में जिला चिकित्सालय अनुपपुर में विषय विषेषज्ञों की शासन द्वारा कुल 29 पद स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें से मात्र 9 विशेषज्ञ ही कार्यरत हैं। वहीं 20 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसी तरह द्वितीय श्रेणी के लिए 29 पद स्वीकृत हैं जिसमें मात्र 12 लोग ही कार्यरत हैं, 17 पद रिक्त हैं। तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए चिकित्सालय में 195 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 134 कर्मचारी कार्यरत हैं और 61 पद रिक्त पड़े हुए हैं तथा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए 42 पद स्वीकृत हैं जिसमें सिर्फ 11 कर्मचारी कार्यरत है। 31 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इस तरह जिला चिकित्सालय अनूपपुर में शासन द्वारा कुल 295 पद स्वीकृत है जिसमें सिर्फ 166 विषय विशेषज्ञ एवं कर्मचारी ही कार्यरत हैं जबकि 130 पद रिक्त पड़े हैं। रिक्त पदों में विषय विषेषज्ञ एवं अधिकारी कर्मचारी न होने से चिकित्सालय में आने वाले मरीजों की चिकित्सा एवं देख रेख करने में जनता को भारी परेशानी हो रही है।


