विशेषज्ञों ने आर्थिक नीतियों पर किया विचार विमर्श:डॉ. मनमोहन सिंह को दिया गया ट्रिब्यूट, देश-विदेश के अर्थशास्त्रियों ने साझा किए नवाचार के सुझाव

भारतीय आर्थिक संघ (आईईए) के 107वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन समारोह अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, शोधकर्ता और विशेषज्ञ शामिल हुए। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी. सतीश रेड्डी (पूर्व सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग और डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष) ने शिरकत की। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन में प्रो. अमेरिका सिंह, चेयरमैन, इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन (आईईए) और कुलपति, विक्रांत विश्वविद्यालय, ग्वालियर ने स्वागत भाषण दिया। उनके साथ ब्रह्माकुमारी संस्थान से राजयोगिनी सुषमा दीदी और ब्रह्माकुमारी परिवार की बहनों ने विशिष्ट अतिथि के रूप में मानसिक शांति और आध्यात्मिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. चरण सिंह (सीईओ और संस्थापक निदेशक, ईग्रो फाउंडेशन) और डॉ. आशुतोष पंत (शैक्षणिक एवं कौशल विशेषज्ञ) ने भारत की आर्थिक नीति और नई शिक्षा नीति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. अनिल कुमार राय (कुलपति, पं. दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर) और डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत नारायण भट्ट उपस्थित रहे। इनके अलावा, आईईए के अध्यक्ष प्रो. आद्या प्रसाद पांडे और सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. विक्रम चड्ढा ने सम्मेलन की सफलता के लिए अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में डॉ. सुल्तान सिंह (निदेशक अनुसंधान, विक्रांत विश्वविद्यालय, ग्वालियर) और डॉ. अशोक आचार्य (डायरेक्टर, सिंघानिया लॉ कॉलेज) को विशेष भामाशाह सम्मान से नवाजा गया। अपेक्स यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री रवि जुनिवाल को उनके प्रेरणादायक योगदान के लिए विशेष धन्यवाद दिया गया। इस सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, जिनमें थाईलैंड, यूएसए और अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास पर अपने शोध और अनुभव साझा किए। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ, जहां अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं ने विकसित भारत, आर्थिक नीतियों, नवाचार, और वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन भारतीय आर्थिक नीतियों, विकासशील अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, और नवाचार पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। विशेषज्ञों और विद्वानों ने आगामी वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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