वर्ल्ड अपडेट्स:न्यूयॉर्क की जेलों में अब कैदियों को मिलेंगी मुफ्त कॉल्स, 1 अगस्त से लागू होगा फैसला

अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य सरकार ने जेलों में बंद कैदियों को मुफ्त कॉल्स की सुविधा देने का फैसला लिया है। राज्य की सभी जेलों में कैदी अपने परिवार वालों को बिना किसी शुल्क के फोन कॉल कर सकेंगे। नई व्यवस्था 1 अगस्त से लागू होगी। फिलहाल कैदियों को हर हफ्ते सिर्फ तीन मुफ्त कॉल (15-15 मिनट की) मिलती हैं। इसके बाद की कॉल्स के लिए उन्हें हर मिनट 2.4 सेंट या लगभग 2 रुपए चुकाने पड़ते हैं। न्यूयॉर्क राज्य के जेल विभाग का कहना है कि परिवार से संपर्क बनाए रखना, जेल के अंदर तनाव और झगड़े को कम करता है। विभाग के प्रमुख डैनियल मार्टुसेलो ने कहा, जेल में रहते हुए परिवार से जुड़ाव बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। यह भावनात्मक सहारा देता है और कैदियों के व्यवहार में सुधार लाता है। इससे उनकी रिहाई के बाद दोबारा अपराध करने की संभावना भी घटती है। न्यूयॉर्क शहर की जेलों में 2019 से ही कॉल्स मुफ्त हैं। कनेक्टिकट पहला राज्य था जिसने पूरे राज्य की जेलों में मुफ्त कॉल्स की सुविधा दी। राज्य सरकार ने बताया कि मुफ्त कॉल्स का खर्च जेल विभाग के मौजूदा बजट से ही उठाया जाएगा। कैदियों या उनके परिवार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका B-2 बमवर्षक विमान के सामने आया पैसेंजर प्लेन, पायलट की सूझबूझ से हादसा टला अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य में B-52 बमवर्षक विमान और एक पैसेंजर फ्लाइट आमने-सामने आ गए। हालांकि पायलट की सूझबूझ से हादसा टल गया। घटना पिछले हफ्ते शुक्रवार को मिनोट शहर के हवाई अड्डे के पास हुई। स्काइवेस्ट एयरलाइंस का एक पैसेंजर प्लेन लैंड करने की तैयारी कर रहा था, तभी उसके रास्ते में अचानक अमेरिकी एयरफोर्स का B-52 बमवर्षक आ गया। पैसेंजर फ्लाइट के पायलट ने खतरे को भांपते ही विमान को अचानक मोड़ दिया। इससे विमान में बैठे यात्री घबरा गए। लेकिन टक्कर नहीं हुई और सभी सुरक्षित रहे। अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल से चूक हुई। बमवर्षक विमान को जानकारी दी गई थी कि फ्लाईपास्ट के बाद वह 3 किलोमीटर पश्चिम की ओर चले जाए, लेकिन उसे ये नहीं बताया गया कि उसी रास्ते पर एक पैसेंजर विमान भी आ रहा है। इटली की संवैधानिक कोर्ट का फैसला- समलैंगिक मां की पार्टनर को भी मिलेगा पितृत्व अवकाश इटली में अब समलैंगिक मां की पार्टनर भी पितृत्व अवकाश की हकदार है। अदालत ने सिर्फ बायोलॉजिकल फादर को 10 दिन का पितृत्व अवकाश देने वाले 2001 के कानून को असंवैधानिक बताया है। सोमवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा, बच्चे की परवरिश का अभिभावकों के यौन रुझान से कोई लेना-देना नहीं है। बच्चे को दोनों पैरेंट्स से जुड़ने का हक है, चाहे वे समलैंगिक हों या विषमलैंगिक। कोर्ट ने दोहराया कि बच्चे का हित सर्वोपरि है।यह फैसला इटली में LGBTQ+ अधिकारों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार पारंपरिक परिवार मॉडल को बढ़ावा दे रही है और सरोगेसी पर सख्ती कर रही है। इस लिहाज से भी यह फैसला अहम है। पाकिस्तानी कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में बादल फटने से बाढ़; 5 की मौत, 200 से ज्यादा टूरिस्ट्स को रेस्क्यू किया पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में बादल फटने और भारी बारिश से आई अचानक बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। 200 से ज्यादा फंसे टूरिस्ट्स को रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है, जबकि कम से कम 5 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अब भी लापता हैं। बबूसर इलाके में 4 टूरिस्ट्स की मौत हुई है, वहीं 15 लापता, 2 घायल हुए हैं। 30 से ज्यादा गाड़ियां पानी में बह गईं। पाकिस्तान आर्मी की FCNA यूनिट हेलिकॉप्टर से फंसे लोगों तक खाना और दवाइयां पहुंचा रही है। बबूसर रोड अब भी बंद है, लेकिन हाईवे और कनेक्टिंग रोड्स की मरम्मत शुरू हो गई है। 50 से ज्यादा घर तबाह, कई स्कूल, मस्जिदें, पुलिस चेकपोस्ट और ब्रिज बह गए। NDMA के अनुसार 26 जून से अब तक 221 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 104 बच्चे और 40 महिलाएं शामिल हैं। 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी सीनेटर की भारत को धमकी, कहा- रूसी तेल लोगे तो 100% टैरिफ लगाएंगे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर पुतिन को यूक्रेन जंग में फंडिंग कर रहा है। अमेरिका अब यह बर्दाश्त नहीं करेगा। ग्राहम ने भारत के अलावा चीन और ब्राजील को भी यह धमकी दी है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ग्राहम ने कहा ट्रम्प चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर भारी टैक्स लगाएंगे जो रूस से तेल खरीदते हैं। ये देश रूस के 80% तेल एक्सपोर्ट के लिए जिम्मेदार हैं। पुतिन की जंग इन्हीं के पैसे से चल रही है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प तेल से जुड़े हर सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएंगे ताकि रूस की आर्थिक सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो जाए। ग्राहम ने रूसी राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा कि तुमने डोनाल्ड ट्रम्प को हल्के में लिया, यह तुम्हारी सबसे बड़ी भूल है। अब तुम्हारी इकोनॉमी बर्बाद होगी। हम यूक्रेन को हथियार भेज रहे हैं ताकि वह पुतिन से लड़ सकें। उन्होंने दावा किया कि पुतिन सोवियत संघ जैसी ताकत दोबारा बनाना चाहते हैं, और उन देशों पर कब्जा करना चाहते हैं जो उनके नहीं हैं। निमिषा प्रिया केस: मृतक के भाई ने मीडिया कार्यकर्ता पर फ्रॉड के आरोप लगाए, कहा- बिना सहमति ₹34 लाख की क्राउड-फंडिंग की निमिषा प्रिया मामले में मृतक तलाल अब्दो महदी के भाई अब्दुल फतह महदी ने मीडिया एक्टिविस्ट सैमुअल जेरोम पर फ्रॉड के आरोप लगाए। अब्दुल ने दावा किया कि जेरोम ने निमिषा के नाम पर जुटाए गए फंड के दुरुपयोग किया है। अब्दुल ने कहा- जेरोम ने खुद को वकील बताकर यमन में पीड़ित परिवार की जानकारी या सहमति के बिना 34 लाख रुपए से ज्यादा की क्राउड-फंडिंग इकट्ठा की। अब्दुल ने जेरोम को अपने आरोपों को गलत साबित करने की चुनौती दी। अब्दुल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा- जब यमन के राष्ट्रपति ने फांसी को मंजूरी दी, तो मैं सना में जेरोम से मिला। उन्होंने मुस्कुराते हुए बधाई दी। उन्होंने जेरोम पर मध्यस्थता के नाम पर खून का व्यापार करने का आरोप लगाया। इस बीच, सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल ने जेरोम से खुद को अलग कर लिया। काउंसिल के कानूनी सलाहकार सुभाष चंद्रन के.आर. ने बताया कि जेरोम ने 27 दिसंबर 2024 को दूतावास के जरिए करीब 17 लाख रुपए मिलने के बाद 28 दिसंबर को काउंसिल छोड़ दी थी। सुभाष ने कहा- उनके जाने की वजह काउंसिल की उनके काम को लेकर पूछताछ थी। सुभाष ने बताया कि जेरोम, उपाध्यक्ष दीपा जोसेफ और सदस्य बाबू जॉन ने 15 जुलाई को फांसी टलने के बाद मध्यस्थता करने वालों का अपमान किया। उन्होंने सुन्नी नेता कंथापुरम अबूबक्कर मुस्लियार और यमनी सूफी विद्वानों के खिलाफ गलत दावे किए थे। काउंसिल ने तलाल महदी के परिवार से इसके लिए माफी मांगी और कहा कि निमिषा और तलाल दोनों के परिवार धोखे का शिकार हुए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की FBI रिकॉर्ड जारी किए, परिवार ने आपत्ति जताई ट्रम्प प्रशासन ने नोबेल पुरस्कार विजेता और नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की FBI से जुड़े लगभग 2 लाख पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। ये दस्तावेज 1977 से गोपनीय थे और नेशनल आर्काइव्ज में रखे गए थे। किंग के परिवार और उनके संगठन ने इस रिलीज का विरोध किया है। 1968 में किंग की हत्या के समय उनके दो बच्चे, मार्टिन लूथर किंग तृतीय और बर्निस किंग 10 और 5 साल के थे। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को संवेदनशीलता और सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। परिवार का मानना है कि किंग की हत्या एक साजिश थी, जिसमें सरकारी एजेंसियां शामिल हो सकती थीं। उनका कहना है कि FBI ने किंग और नागरिक अधिकार आंदोलन को बदनाम करने के लिए कॅाइनटेलप्रो (COINTELPRO) नामक अभियान चलाया था। किंग सेंटर और कुछ कार्यकर्ताओं ने इस रिलीज को ट्रम्प और जेफ्री एपस्टीन की ओर से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। ये दस्तावेज 2027 तक गोपनीय रहने थे, अब इतिहासकारों और पत्रकारों के लिए उपलब्ध हैं। किंग की हत्या 4 अप्रैल 1968 को मेम्फिस, टेनेसी में हुई थी, जब वे हड़ताल पर गए कुछ सफाई कर्मचारियों का समर्थन कर रहे थे। जेम्स अर्ल रे को उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया था, लेकिन किंग परिवार का मानना है कि रे अकेला नहीं था। 1999 में एक नागरिक मुकदमे में कोर्ट ने भी साजिश की बात स्वीकारी थी।

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