भास्कर न्यूज | लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड के एड़ादोन गांव में जन्मे शहीद विश्राम टाना भगत ने भारत भूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर पूरे भारत सहित जिले को भी गौरवान्वित किया है। कारगिल युद्ध में लोहरदगा के बेटे ने अपने प्राणों की परवाह किये बिना जांबाजी से दुश्मन से लोहा लेते हुए शहादत को प्राप्त किया। कारगिल शहीद विश्राम टाना भगत के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। वर्ष 2001 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में शहीद विश्राम टाना भगत दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। उनके छोटे भाई बाबूलाल टाना भगत, भतीजा अर्जुन टाना भगत सहित गांव के अन्य युवा शामिल हैं। कैरो के एड़ादोन गांव में पांच जनवरी 1970 को जन्मे शहीद विश्राम टाना भगत प्रारम्भ से ही देशभक्त थे। 25 जनवरी 2001 को कारगिल युद्ध में उन्होंने जांबाजी दिखाते हुए से भारत माता पर अपने पांव न्योछावर कर दिया। विश्राम टाना भगत ने अपने देश के प्रति जो योगदान दिया, वह उनके गांव के युवाओं को आज भी उर्जा दे रहा है। गांव में बने शहीद स्मारक पर विश्राम टाना भगत की शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर शहीद को याद किया जाता है। शहीद विश्राम टाना भगत की पत्नी स्व तारामणि को समाहरणालय स्थित आपदा प्रबंधन कार्यालय में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर कार्य मिला था। परन्तु गंभीर बीमारी से जूझते हुए उनकी भी वर्ष 2025 जनवरी में निधन हो गया था। आज भी उनकी शहादत पर पूरे जिले सहित गांव को गर्व तो होता है। लेकिन उनकी याद में आंखें नम हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि आज खुशबू भगत रांची महिला कालेज से पीजी कर रही है, वह भी अपने पिता की ही भांति देशभक्त है। देश के लिए कुछ कर गुजरने को सदा तैयार रहती है। शहीद के जाने के बाद उनकी पत्नी स्व तारामणि ने ही कि पूरे परिवार की गाड़ी खींची।


