झारखंड हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी द्वारा विनोबा भावे विवि, हजारीबाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ मिथिलेश कुमार सिंह के मामले में अहम आदेश जारी किया है। कहा है कि रांची यूनिवर्सिटी द्वारा लियन (अवकाश) को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई की जाती है, तो हाईकोर्ट के अंतिम अंतिम फैसले से प्रभावित होगा। हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय को समय देते हुए चांसलर और विनोबा भावे विश्वविद्यालय को भी पार्टी बनाया है। डॉ मिथिलेश की ओर से अधिवक्ता रूपेश सिंह ने पक्ष रखा। वहीं वर्तमान प्रभारी वीसी डॉ दिनेश कुमार सिंह पत्र जारी कर कहा है कि 10 दिन में योगदान नहीं देते हैं तो सेवा समाप्त कर दी जाएगी। एजुकेशन रिपोर्टर|रांची डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) ने 21 जुलाई को कैंपस में छात्रों के धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दिया गया था। छात्र संगठनों ने इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन किया था और आदेश को वापस लेने की मांग की थी। 5 दिन बाद आदेश को संशोधित करते हुए धरना-प्रदर्शन पर रोक से संबंधित आदेश को विवि प्रशासन ने वापस ले लिया है। इससे संबंधित संशोधित नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। बताते चलें कि भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष सह सीनेटर शशांक राज, पूर्व प्रेसिडेंट नीरज, छात्र आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, जेसीएम के अमन तिवारी, एसीएस के विवेक तिर्की, अबुआ अधिकार मंत्र के अभिषेक झा समेत अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों प्रॉक्टर डॉ राजेश कुमार सिंह और रजिस्ट्रार डॉ धनंजय द्विवेदी के बीच बातचीत में आदेश को संशोधन करने पर सहमति बनी। संशोधन का छात्र संगठनों ने स्वागत किया।


