पॉलिटिकल रिपोर्टर| रांची झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के आरोपों को नकारते हुए पलटवार किया है। कहा कि भाजपा राज्यपाल के नाम पर ओछी राजनीति कर रही है। उसका आरोप न केवल भ्रामक, बल्कि राज्य के युवाओं की आकांक्षाओं का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार द्वारा लाए गए नए विधेयक का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना है। पांडेय ने कहा कि जब केंद्र सरकार विश्वविद्यालयों में कुलपति और अन्य पदों पर एकतरफा नियुक्तियां करती है, तब भाजपा को लोकतंत्र की याद क्यों नहीं आती? पॉलिटिकल रिपोर्टर| रांची प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने शुक्रवार को कहा कि राज्यपाल की भूमिका को कमजोर करना लोकतंत्र पर हमला है। राज्यपाल की जगह राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विश्वविद्यालयों के वीसी, प्रो-वीसी एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करने का निर्णय असंवैधानिक, दुर्भावनापूर्ण और लोकतंत्र के मूलभूत ढांचे पर प्रहार है। यह उच्च शिक्षण संस्थानों को कठपुतली बनाने का षड्यंत्र है। कहा कि राज्यपाल किसी भी राज्य में संविधान के संरक्षक होते हैं और विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति के रूप में उनकी भूमिका संस्थानों की निष्पक्षता, गरिमा और स्वायत्तता सुनिश्चित करती है। रांची| प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने गठबंधन सरकार द्वारा विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन एवं उर्दू शिक्षकों के नियुक्ति के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में उन्हें ही कुलपति नियुक्त किया जाए, जो झारखंडवासी हों। तिर्की ने कहा कि आयोग के गठन से असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी। झारखंड के लोगों को नौकरी का अवसर प्राप्त होगा। तिर्की शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। झारखंड में उच्च शिक्षा का संकट भाजपा की देन पांडेय ने कहा कि झारखंड में उच्च शिक्षा का जो संकट आज है, वह भाजपा की वर्षों की लापरवाह सरकारों की देन है। यह भाजपा की सरकारों की विरासत है कि झारखंड के नौजवानों को मेडिकल, तकनीकी, प्रबंधन और व्यावसायिक शिक्षा के लिए हजारों किलोमीटर दूर दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। विवि की स्वायत्तता को कुचलना चाहती है सरकार प्रतुल ने कहा कि हेमंत सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कुचलना चाहती है और योग्यताओं की जगह चाटुकारिता को बढ़ावा देना चाहती है। यह निर्णय न केवल संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, बल्कि इससे झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को बड़ी क्षति पहुंचेगी।


