पलामू की पुलिस को उस वक्त एक बड़ी कामयाबी मिली, जब एक किडनैपिंग की सूचना पर की गई कार्रवाई ने अंतरराज्यीय अफीम तस्करी के नेटवर्क का खुलासा कर दिया। मामला तब सामने आया जब पंजाब की एक महिला ने पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन को फोन कर बताया कि उसके भाई और उसके साथियों का अपहरण हो गया है। फोन कॉल मिलते ही पलामू पुलिस एक्टिव हुई। जांच और दबिश के बाद जब पुलिस अपहृतों की तलाश में पिपराटांड़ पहुंची तो मामला कुछ और ही निकला। असल में, पंजाब से आए तस्करों को उनके ही स्थानीय तस्करी के साथियों ने अफीम के पैसों को लेकर बंधक बना लिया था। इसके पीछे की वजह आपसी लेनदेन में हुई अनबन और फिरौती की मांग थी। बंधक बना कर मांगी गई फिरौती पिपराटांड़ के तितलंगी गांव निवासी अफीम तस्कर डब्लू यादव ने अपने बेटों के साथ मिलकर पंजाब से आए हरमीत सिंह और सतबीर सिंह को बंधक बना लिया था। सतबीर की बहन से 10 लाख की फिरौती मांगी गई थी। महिला ने डब्लू यादव के बेटे पिंटू यादव के खाते में साढ़े सात लाख रुपए जमा भी कर दिए थे। पुलिस ने जब डब्लू यादव के घर पर दबिश दी, तो वहां से बंधक बनाए गए सतबीर और हरमीत को सकुशल मुक्त करा लिया गया। साथ ही मौके से 33 लाख रुपए नकद, तीन क्विंटल 14 किलो डोडा और तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली दो होंडा सिटी कार, दो बोलेरो गाड़ी, 12 मोबाइल फोन और डोडा व्यापार से जुड़ी एक डायरी भी बरामद की गई। गिरफ्तार हुए आठ तस्कर पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पंजाब के लुधियाना निवासी हरमीत सिंह (35), पारस चौहान (29), सतबीर सिंह (38), ओम प्रकाश तिवारी (36) और झारखंड के पिपराटांड़ के तितलंगी निवासी डब्लू यादव (60), उनके पुत्र पिंटू कुमार यादव (30), रिंकू कुमार यादव (25) और लोहरसी निवासी नीरज कुमार पासवान (26) शामिल हैं। नीरज स्थानीय चौकीदार का बेटा है। पुलिसकर्मियों की भूमिका भी मिली संदिग्ध एसपी रीष्मा रमेशन ने बताया कि इस मामले में पिपराटांड़ थाना के कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। इस पहलू की भी गहराई से जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लेस्लीगंज एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी, जिसने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया कि ये तस्कर पहले भी अफीम और डोडा खरीदने झारखंड आ चुके हैं। चतरा के रास्ते यह तस्करी होती थी। ओमप्रकाश तिवारी इस धंधे में बिचौलिये की भूमिका निभाता था। वह पंजाब से तस्करों को लाकर झारखंड में अफीम की डील कराता था। अफीम तस्करी का है बड़ा धंधा डोडा की कीमतों को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। झारखंड में डोडा 800 रुपए प्रति किलो मिलता है, जबकि पंजाब में यह 2000 रुपए किलो तक बेचा जाता है। इससे तस्करों को मोटा मुनाफा होता है। एसपी ने कहा कि पलामू पुलिस इस पूरे गिरोह की जड़ तक जाने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है। अफीम तस्करी से जुड़ा यह बड़ा नेटवर्क झारखंड के नाम को बदनाम कर रहा था, जिसे समय रहते पकड़कर तोड़ा गया है।


