बिलासपुर के बिलासा देवी एयरपोर्ट के विकास में हो रही लेटलतीफी को लेकर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सीजे रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने केंद्र व राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। सीजे सिन्हा ने कहा कि आप स्टेटमेंट दे दीजिए कि सरकार कुछ नहीं कर पाएगी, हम पीआईएल खत्म कर देते हैं। बिलासपुर का भाग्य कभी तो जागेगा। राज्य और केंद्र दोनों जगह आपकी ही सरकार है, फिर भी यह हाल है। अधिकारियों के बॉडी लैंग्वेज से लगता ही नहीं कि वे कुछ करना चाहते हैं। हाई कोर्ट ने प्रदेश मुख्य सचिव और रक्षा मंत्रालय के सचिव से अगली सुनवाई में शपथ पत्र के साथ काम की प्रगति की जानकारी मांगी है। बिलासपुर के चकरभाठा स्थित बिलासा देवी एयरपोर्ट के डेवलपमेंट, 3सी से 4 सी कैटेगरी में अपग्रेड करने, नाइट लैंडिंग की सुविधा, महानगरों के लिए सीधी उड़ान की मांग करते हुए दो जनहित याचिकाएं लगाई गई थीं। सालों से इस पर सुनवाई हो रही है। यहां तक कि एयरपोर्ट को शुरू हुए करीब चार साल पूरे चुके हैं, लेकिन काम की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है। रक्षा मंत्रालय से जमीन का हस्तांतरण समेत कई प्रक्रियाएं अटकी हुई हैं। शुक्रवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव और एडवोकेट संदीप दुबे ने एयरपोर्ट के मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए महाधिवक्ता से कहा कि आप स्टेटमेंट दे दीजिए कि सरकार कुछ नहीं कर पाएगी, हम पीआईएल खत्म कर देते हैं। सीजे बोले- कभी तो जागेगा बिलासपुर का भाग्य: चीफ जस्टिस ने कोर्ट में स्पष्ट कहा- हर बार सुनवाई पर समय मांगा जाता है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। लगता है जब नई सरकार आएगी, तब शायद बिलासपुर का भाग्य जगेगा। फोटो में गाड़ी दिख रही, कुछ लोग दिख रहे, काम कहां हो रहा है?
राज्य सरकार की ओर से जवाब में कुछ फोटोग्राफ्स कोर्ट में पेश किए और दावा किया कि एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग से जुड़ा कार्य प्रगति पर है। लेकिन तस्वीरें देखकर चीफ जस्टिस ज्यादा नाराज हो गए। उन्होंने तल्ख लहजे में पूछा- क्या दिख रहा है इन तस्वीरों में? एक गाड़ी खड़ी है, पीछे दो-चार लोग खड़े हैं। काम कहां हो रहा है? जरा हमें भी दिखाइए। डिफेंस ने दे दी थी मंजूरी, फिर क्यों अटका काम?
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि रक्षा मंत्रालय पहले ही 286 एकड़ जमीन पर रनवे विस्तार व अन्य कार्यों की अनुमति राज्य सरकार को दे चुका है। इस पर कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि जब अनुमति मिल गई, तो अब क्या अड़चन है? इस पर बताया गया कि रक्षा मंत्रालय जमीन के बदले ज्यादा रकम की मांग कर रहा है, जबकि राज्य सरकार चाहती है कि पहले जमीन उसके नाम हो, तभी आगे का कार्य शुरू किया जाए।


