चार लाख अधिकारी व कर्मचारियों के वित्तीय लेन-देन पर पैनी-नजर:6 माह के मूल वेतन से अधिक निवेश का प्रमाण जरूरी, वरना होगी कार्रवाई

प्रदेश के चार लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के हर वित्तीय लेनदेन पर सरकार की पैनी नजर रहेगी। अगर कोई कर्मी अपने 6 माह के मूल वेतन से अधिक रकम शेयर, डिबेंचर, म्युचुअल फंड में निवेश करता है तो उसे शासन को इसकी जानकारी देनी होगी। यहीं नहीं अगर दो माह के वेतन के बराबर रकम एकमुश्त निकासी की जाती है तब भी इसे सरकार के रिकॉर्ड में लाना शासकीय कर्मी की जिम्मेदारी होगी। ऐसी कोई भी जानकारी छिपाने वाले को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसी के साथ वित्त विभाग ने शेयर, डिबेंचर और म्युचुअल फंड को भी चल संपत्ति में शामिल कर लिया गया है। जीएडी सचिव रजत कुमार के अनुसार शेयर, डिबेंचर या अन्य निवेशों की बार-बार खरीदी बिक्री को आचरण नियम का उल्लंघन माना जाएगा। संबंधित सरकारी अधिकारी-कर्मचारी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आएगा। इस बारे में सरकुलर भी जारी कर दिया गया है। अगर कोई सरकारी सेवक अपने या परिवार के सदस्य के नाम से छह माह के मूल वेतन से अधिक निवेश करता है, तो उसे इसकी सूचना विभागीय प्रमुख को देनी होगी। इसमें रकम का स्रोत भी बताना पड़ेगा। भास्कर एक्सपर्ट – संजय झाबक, चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमों में संशोधन कर शासन ने लिया अच्छा फैसला पहले शेयर व म्युचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा माना जाता था। इसलिए कर्मचारी बेहतर भविष्य के लिए बीमा में निवेश करते थे। कोरोना के वक्त जब सब कुछ बंद था तब लोग शेयर मार्केट में काफी रूचि ले रहे थे। म्यूचुअल फंड की तरफ भी रुझान बढ़ा है। शासन द्वारा नियमों में संशोधन किया जाना अच्छा फैसला है। कर्मचारियों को इंवेस्टमेंट को जस्टिफाई करना होगा। उन्हें रीजनेबल टाइम का भी ध्यान रखना होगा। नहीं तो कानून का उल्लंघन होगा। क्या है अधिसूचना में
जीएडी के उप सचिव केके बाजपेयी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को शेयर, प्रतिभूतियों, डिबेंचर, म्युचुअल फंड में निवेश पर रोक थी। इसकी बार-बार खरीद-बिक्री को सट्टा माना गया था। अब इसमें संशोधन किया गया है। अब इसमें शर्तों के साथ छूट दी गई है। क्या है फॉर्मेट में
सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को तय फॉर्मेट में अपने हस्ताक्षर के साथ जानकारी देनी होगी कि प्रतिभूतियों, शेयर में कितना निवेश किया है। कैलेंडर वर्ष में शेयर, सेक्युरिटीज, डिबेंचर व अन्य इंवेस्टमेंट की विवरण देना होगा। यह भी बताना होगा कि किस फर्म, पार्टी के साथ ट्रांजेक्शन हुआ है। साथ ही निवेश की रकम के स्रोत की जानकारी प्रमाण के साथ देनी होगी।

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