स्कूलों में तीसरे दिन भी नहीं बना मध्यान्ह भोजन:कोंडागांव के 3000 रसोइए मानदेय वृद्धि की मांग पर अड़े, बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में रसोइयों का तीन दिवसीय धरना आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। डीएनके मैदान में तेज बारिश के बावजूद कोंडागांव, केशकाल, माकड़ी, फरसगांव और बड़ेराजपुर ब्लॉक से हजारों रसोइए अपनी मांगों को लेकर इकट्ठा ​हुए। प्रदर्शन के अंतिम दिन रसोइयों ने एसडीएम अजय उरांव को ज्ञापन सौंपा। रसोइयों का कहना है कि वे सालों से न्यूनतम मानदेय पर काम कर रहे हैं। पहले उनसे केवल तीन घंटे का कार्य लिया जाता था, लेकिन अब पूरे दिन की ड्यूटी के बावजूद उन्हें मात्र 60 रुपए प्रति दिन मिल रहे हैं। जिलाध्यक्ष सगराम मरकाम, जिला सचिव शंभूलाल मरकाम, जिला कोषाध्यक्ष कुमार सिंह मरकाम और संरक्षक दयालु भारद्वाज ने कहा कि सरकार के चुनावी वादे के अनुसार 50 प्रतिशत मानदेय वृद्धि जल्द दी जानी चाहिए। 3000 रसोइया बना रहे खाना रसोइयों की अन्य मांगों में अंशकालिक से पूर्णकालिक रूप से कार्यरत रसोइयों को कलेक्टर दर पर भुगतान और बिना कारण किसी भी रसोइया को कार्य से न हटाना शामिल है। जिले में लगभग 3000 रसोइया सालों से मध्यान्ह भोजन योजना चला रहे हैं। कई रसोइए 1995 से इस सेवा में लगे हुए हैं। कलेक्टर दर पर भुगतान नहीं होने पर मानदेय की मांग रसोइयों ने कहा कि यदि कलेक्टर दर पर भुगतान संभव नहीं है, तो इतना मानदेय अवश्य दिया जाए। जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। उन्होंने बताया कि आज सरकार के किसी भी कर्मी को 60 रुपए का भुगतान नहीं होता है। नहीं बन पाया है पिछले दो दिनों से स्कूलों में भोजन हड़ताल के कारण जिले के स्कूलों में पिछले दो दिनों से मध्यान्ह भोजन नहीं बन पाया है। कुछ स्कूलों में बच्चों को सूखा राशन या वैकल्पिक खाद्य सामग्री वितरित की गई, जबकि अन्य स्कूलों में स्व सहायता समूहों के माध्यम से भोजन तैयार कराया गया। रसोइयों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले सकता है।

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