निशिकांत बोले-1971 में इंदिरा गांधी ने अमेरिका से मदद मांगी:सरकार को खतरे में बताया था; गांधी परिवार ने भारत के इतिहास को बिगाड़ा

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान युद्धविराम के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी, जबकि भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ लिया था। दुबे ने इंदिरा गांधी के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को 5 दिसंबर 1971 को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें युद्धविराम कराने में मदद का अनुरोध किया गया था। भारत सरकार को खतरे में बताया गया था। निशिकांत का ये बयान राहुल गांधी के 29 जुलाई को लोकसभा में दिए बयान के बाद आया, जिसमें राहुल ने कहा था ‘मौजूदा सरकार में पाकिस्तान से मुकाबला करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।’ वहीं, भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के शासन में कांग्रेस सरकार ने इस भारत के इतिहास को विकृत (बिगाड़ा) किया है। गांधी परिवार जीवन भर दूसरे देशों के सामने आत्मसमर्पण करता रहा है। निशिकांत का बयान… यह 5 दिसंबर 1971 का एक पत्र है, जो इंदिरा गांधी ने अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को लिखा था। उन्होंने लिखा था कि हमारी सरकार खतरे में है और भारत युद्धविराम चाहता है। आप पाकिस्तान को मनाएं, इतना बड़ा आत्मसमर्पण, इतना बड़ा झूठ। 1971 का पूरा इतिहास इंदिरा गांधी के लिखे गए इस एक पत्र में समाहित है। जब लोगों को लगा कि हम अपना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ले सकते हैं, जब हमने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया था, उस समय अचानक युद्धविराम हो गया। इस इतिहास को देखने के बाद, क्या आपको नहीं लगता कि कांग्रेस ने पूरे मीडिया को नियंत्रित किया था? कांग्रेस ने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की। हमें बचपन से यही सिखाया गया है कि निक्सन और किसिंजर को अंदर आने नहीं दिया गया, लेकिन इतिहास यही है कि भारत गांधी ने 1971 में आत्मसमर्पण किया था। मैंने अध्यक्ष (ओम बिरला) से कहा है कि वे उनके भाषण को हटा दें या उन्हें संसद में माफी मांगने के लिए कहें। भाजपा गांधी परिवार नहीं निशिकांत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनसे बात की थी, तो उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान हम पर हमला करता है, तो हम दोगुनी ताकत से हमला करेंगे। उन्होंने कहा- ऐसा नहीं है कि आप (सरकार) गुप्त रूप से कुछ कर रहे हैं, पत्र लिख रहे हैं, विनती कर रहे हैं और आत्मसमर्पण कर रहे हैं। यह (केंद्र सरकार) गांधी परिवार नहीं है। मैंने कल बताया था कि नेहरू ने 1962 का युद्ध अमेरिका के साथ लड़ा था। हमने अपना चारबतिया हवाई अड्डा उन्हें इस्तेमाल के लिए दिया था और 1963 में उनके साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। नंदा देवी में परमाणु उपकरण रखे गए हैं, जिसके कारण उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश का पूरा हिमालयी क्षेत्र समस्याओं का सामना कर रहा है, क्योंकि हमने अमेरिका को अपने परमाणु उपकरण रखने की अनुमति दी थी। दुबे ने कहा कि हमने वियतनाम युद्ध में अमेरिका का समर्थन किया था। पूरे गांधी परिवार ने इस देश को बेच दिया है। उन्होंने इस देश के इतिहास को विकृत किया है, और वे जीवन भर आत्मसमर्पण करते रहे हैं। राजनाथ के बयान पर आया था राहुल का जवाब राहुल गांधी ने कल लोकसभा में राजनाथ सिंह की उस टिप्पणी का जिक्र किया था, जिसमें रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना 1971 के युद्ध से की थी। राहुल ने कहा था- उन्होंने 1971 के युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर का तुलना करते हुए कहा था कि मौजूदा सरकार का संकल्प तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व के संकल्प के आसपास भी नहीं है। उन्होंने कहा था कि राजनाथ सिंह ने 1971 के युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना की। मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि 1971 में राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। इंदिरा गांधी ने सैम मानेकशॉ को पूरी आजादी दी थी, तब भी जब अमेरिकी जहाज अंदर आए थे। ………………………………. 1971 भारत-पाकिस्तान जंग की पूरी जानकारी के लिए इस खबर को पढ़ें… फूट–फूटकर रोए पाकिस्तानी जनरल नियाजी: फिर पिस्टल देकर किया सरेंडर, 1971 में आज शुरू हुई थी बांग्लादेश के लिए जंग पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने भारतीय कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने अपने 90 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया। दुनिया के इस सबसे बड़े सरेंडर के साथ भारत-पाकिस्तान के बीच छिड़ी तीसरी जंग खत्म हो गई। पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया और एक नए आजाद मुल्क बांग्लादेश का जन्म हुआ। पूरी खबर पढ़ें…

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