पंजाब के लेफ्टिनेंट कर्नल और नायक लद्दाख में शहीद:फायरिंग रेंज की तरफ जा रहे थे, भूस्खलन से गाड़ी पर गिरी चट्टान; अंतिम विदाई आज

पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर के दो जवान लद्दाख की पहाड़ियों में देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। पठानकोट के लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह और गुरदासपुर के नायक दलजीत सिंह लद्दाख में हुए भूस्खलन की चपेट में आ गए। हादसा बुधवार सुबह दुर्बुक से चोंगताश की ओर जाते वक्त हुआ, जब सेना के काफिले पर अचानक एक बड़ी चट्टान आ गिरी। जिस सैन्य वाहन पर दोनों जवान सवार थे, वह चट्टान की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में मारे गए दलजीत सिंह के परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। 8-9 साल की सर्विस के बाद दलजीत अपने सपनों का घर बनाने वाला था। लेकिन, जिस दिन परिवार ने मिस्त्री ढूंढा, दलजीत की शहादत की सूचना आ गई। सेना के तीन अन्य अधिकारी – मेजर मयंक शुभम (14 सिंध हॉर्स), मेजर अमित दीक्षित और कैप्टन गौरव (60 आर्म्ड) इस हादसे में घायल हो गए हैं। तीनों को लेह के 153 जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। 2 प्वाइंट्स में जानिए आखिर कैसे हुआ हादसा… पठानकोट और शमशेरपुर में पसरा मातम, गांव में गमगीन माहौल
जैसे ही सेना के अधिकारियों ने यह सूचना परिजनों को दी, पठानकोट और गांव शमशेरपुर में शोक की लहर दौड़ गई। गांव में हर आंख नम हो गई। दलजीत सिंह की शहादत की खबर मिलते ही परिवार और ग्रामीणों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसरा है, लोग चुपचाप एक-दूसरे को ढाढ़स बंधा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नायक दलजीत सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना उनका सपना था, जिसे उन्होंने पूरा किया। वे कई वर्षों से लद्दाख में सेवा दे रहे थे। मिस्त्री भी ढूंढा, लेकिन घर का सपना अधूरा रहा गया शहीद जवान के पिता गुलजार सिंह ने बताया, “दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सेना के जवान हमारे घर आए थे। उन्होंने हमें पूरी घटना की जानकारी दी। मेरा बेटा तीन महीने पहले ही छुट्टी से ड्यूटी पर वापस गया था। दो दिन पहले उससे फोन पर बात हुई थी। वह घर बनवाने की योजना बना रहा था। मुझसे कहा था कि कोई अच्छा मिस्त्री देख लेना। कल ही हमने मिस्त्री तय किया था, लेकिन आज ये दुखद खबर आ गई। तब से तो होश ही नहीं है। उसने 8-9 साल की नौकरी में घर बनाने के लिए पैसे जोड़े थे।” मां गुरजीत कौर ने भावुक होते हुए बताया, “परसों फोन पर कहा था – मैं ठीक हूं, थोड़ा काम है, बाद में बात करूंगा। वह बहुत उत्साहित था घर बनाने को लेकर। कहता था – बरसातों के बाद काम शुरू करेंगे। आप मिस्त्री देख लेना। हमने कल ही मिस्त्री ढूंढा था… पर अब सब अधूरा रह गया।” दलजीत के सिर पर चल रहा था परिवार गांव वालों व रिश्तेदारों ने बताया कि दलजीत दो भाई व दो बहनें हैं। दलजीत का भाई दुबई में काम करता है। घर के हालात काफी खराब हैं। घर की हालत भी काफी नाजुक है। दलजीत ने 8-9 साल नौकरी करने के बाद नया घर बनाने के लिए पैसे इकट्‌ठे किए थे। घर बनाने की तैयारी भी कर ली थी। लेफ्टिनेंट कर्नल भानू को जून में ही मिला था प्रमोशन
पठानकोट निवासी भानू प्रताप सिंह हाल ही में प्रमोट होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। परिवार को उन पर गर्व था, लेकिन शहादत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। आज होगा अंतिम संस्कार, लद्दाख से पठानकोट लाए जाएंगे पार्थिव शरीर
सेना की ओर से बताया गया है कि दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर को आज लद्दाख से पठानकोट एयरबेस लाया जाएगा। वहां से शहीद नायक दलजीत सिंह को उनके पैतृक गांव शमशेरपुर और शहीद भानू प्रताप सिंह को उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा। दोनों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। सेना और प्रशासन की ओर से सम्मान-गॉर्ड और पुष्पांजलि दी जाएगी।

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