जल स्रोतों के संरक्षण और इसे अतिक्रमणमुक्त करने के लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी है। नदी-तालाब खत्म होंगे तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसलिए सभी जल स्रोतों के कैचमेंट एरिया को नो एंट्री जोन बनाएं। कैचमेंट एरिया को पिलर और कंटीली तारों से घेरकर संरक्षित करें, ताकि जल स्रोतों की चौहद्दी स्पष्ट रहे। ऐसे में कोई अतिक्रमण नहीं कर पाएगा। हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान नगर विकास सचिव, जल संसाधन सचिव, रांची डीसी और निगम के प्रशासक भी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने बुधवार को इन्हें तलब किया था। इनकी ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सैटेलाइट मैपिंग से नजर रखी जा रही है। नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाकर कैचमेंट एरिया को कब्जामुक्त करा रही है। वहीं हस्तक्षेपकर्ता एडवोकेट खुशबू कटारूका ने कहा कि जल स्रोतों की सफाई नहीं हुई है। अतिक्रमण भी नहीं हटाया गया है। बड़ा तालाब साफ नहीं हो पाया है। -शेष पेज 9 पर कोर्ट ने कहा था-टास्क फोर्स का गठन कर कार्रवाई करें हाईकोर्ट ने सरकार को राज्य के सभी जल स्रोतों को अतिक्रमणमुक्त करने का निर्देश दिया था। फिर कब्जा न हो, इसकी व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया था। साथ ही जल स्रोतों में गंदा पानी और कचरा जाने से रोकने की व्यवस्था करने को कहा था। कोर्ट ने टास्क फोर्स का गठन कर कार्रवाई करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।


