भास्कर न्यूज | बालोद तपागच्छ संत पूज्य योग तिलक मसा के शिष्य श्वेत तिलक मसा एवं 6 अन्य संतों का महावीर भवन में प्रवास है। संत श्वेत तिलक मसा ने कहा कि यह जीव अनंत काल से सुख के लिए भटक रहा है, लेकिन वह सुख से उतना ही दूर होता जाता है क्योंकि जिस मार्ग में सुख खोज रहे हैं, वहां वो है ही नहीं तो प्राप्त कैसे हो सकता है। भौतिक पदार्थों में सुख आंशिक होता है यह स्थायी नहीं होता। जैसे एक बच्चे को खिलौने में आनंद आता है, लेकिन बड़े होने पर वह उसके लिए व्यर्थ हो जाता है। पदार्थों में सुख एक भ्रांति है। यही सुख की भ्रांति हमें गलत दिशा में ले जाती है। जिन्हें सुख के साधन समझ इकट्ठा कर रहे है वो ही दुख के साधन हैं। पदार्थ की गुलामी से मुक्ति में ही सुख है। भगवान ने हमें अपरिग्रह का मार्ग बताया। हमें पुण्य से ही वैभव मिलता है अतः इसे पुण्य के कार्यों में ही लगाना चाहिए। पदार्थों को छोड़ना सुख का मार्ग है। कई- कई जन्मों से पदार्थों के प्रति आसक्ति के कारण परिग्रह छूटता नहीं। ये अलग बात है कि हम न भी छोड़ें तब भी एक दिन सब छूट ही जाता है। अहंकार,मान, माया लोभ ये सब आत्मा के शत्रु है इनसे बचें तथा व्यवहार में शुद्धता एवं पवित्रता को बनाये रखें।


