अहंकार पतन का कारण बनता है, सहयोग से बड़े कार्य सफल होते हैं: संतोष शास्त्री

भास्कर न्यूज | बालोद शहर के शिकारीपारा पानी टंकी के पास में 23 दिसंबर से चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन गुरूवार को कृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई। जब पंडाल में श्रीकृष्ण भगवान का जन्म हुआ। श्रोता खुशी से झूम उठे। आयोजक मनमोहन शर्मा व मीना शर्मा ने उनकी आरती की। कथा वाचक पं. संतोष शास्त्री नर्मदातट मंडला म.प्र. ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय के दृश्य को गीत व संगीत के माध्यम से बताया। इसके पूर्व उन्होंने इंद्र की भूल, दुर्वासा का श्राप, और समुद्र मंथन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया भारतीय पौराणिक कथाओं में इंद्र, दुर्वासा ऋषि और समुद्र मंथन की कथा जीवन के गहरे सबक सिखाती है। यह कथा देवताओं और असुरों के बीच शक्ति संतुलन, सहिष्णुता और परिश्रम का प्रतीक है। उन्होंने बताया एक बार, ऋषि दुर्वासा, जो अपने क्रोध के लिए प्रसिद्ध थे, इंद्र के पास आए। उन्होंने इंद्र को अपने गले की माला भेंट की। इंद्र ने उस माला का आदर नहीं किया और उसे अपने ऐरावत हाथी के गले में डाल दिया।

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