दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को मिलेगा निशुल्क इलाज:पीड़ितों को 50 लाख रुपए तक इलाज और पांच हजार रुपए की मिलेगी मासिक सहायता

दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों का उपचार सरकार की ओर से निशुल्क करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना में 18 वर्ष तक के बच्चों को 50 लाख रुपए का निशुल्क उपचार मिलेगी। अच्छी बात है कि बीमार को हर माह पांच हजार रुपए की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। विभाग ने प्रदेश के सभी सीएमएचओ को जिले में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को चिन्हित करने और इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। दुर्लभ बीमारियों में राष्ट्रीय नीति 2021 में सूचीबद्ध बीमारियां शामिल की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज, देखभाल और आवश्यक सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता देने के निर्देश है। योजना की मॉनीटरिंग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक करेंगे। किसी भी असामान्य मामले में नियमों की शिथिलता के अधिकार विभाग को दिए गए हैं। 56 बीमारियां शामिल राष्ट्रीय नीति में एड्रीनोल्यूकोडिस्ट्राफी, गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षा कमी, क्रॉनिक ग्रेन्यूलोमेटस बीमारी, विस्कॉट- ऑल्ड्रच सिंड्रोम, एक्स लिंक्डएगामाग्लोबुलिनेमिया, ऑस्ट्रीयोपेट्रोसिस, फैनकोनी एनिमिया, टाइरोसीनिमिया, ग्लाइकोजन भंडारण विकार, मेपल सिरप यूरिन रोग, यूरिया चक्र विकार, आर्गेनिक एसिडेमियास, ऑटोसोमल रिसेसिव पॉलिसिस्ट्िक किड़नी रोग, ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलिसिस्टिक किडनी रोग, लारोन सिंड्रोम, ग्लैंजमैन थ्रोबैसथेनिया रोग, जन्मजात हाइपर इंसुलिनेमिक हाइपोग्लाइसीमिया, पारिवारिक होमोजाइगस हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, मैनोसिडोसिस, एक्सवाई डिस् आर्डर सिंड्रोम, प्राथमिक हाइपर ऑक्साल्यूरिया, होमोसाइटीन्यूरा, ग्लूट्रेक एसीडीयूरिया, मिथाइमैलोनिक एसीडिमिया, प्रोपियोनिक एसीडेमिया, आइसोवलरिक एसिडेमिया, ल्यूसीन हाइपोग्लाइसीमिया, गैलेक्टोसेमिया, ग्लूकोज गैलेक्टोज अवशोषण विकार, सीवियर फूड प्रोटीन एलर्जी, ऑस्टियोजेनेसिस इपरफेक्टा, वृद्धि हारमोन की कमी, प्रेडर-विली सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम, नूनन सिंड्रोम, सिस्टिक फाइब्रोसिस, माइटोकॉन्ड्रीयल विकार सहित 56 तरह की बीमारियां शामिल है। पात्रता और शर्तें सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि योजना का लाभ 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मिलेगा। पात्रता के लिए राजस्थान का मूल निवासी होना व पिछले तीन साल से प्रदेश में निवासरत होना जरूरी है। बीमारी के लिए सक्षम चिकित्सा अधिकारी की ओर से दुर्लभ बीमारी का प्रमाणन जरूरी है। यह सहायता बीमारी के इलाज के लिए दी जाएगी और अन्य योजनाओं के तहत भी लाभ लिया जा सकेगा। पीडित बच्चे के बीमारी से ठीक होने या उसकी मृत्यु होने पर सहायता राशि नहीं दी जाएगी। दुर्लभ बीमारियों का प्रमाणन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एस), जोधपुर और जेके. लोन अस्पताल, जयपुर के सक्षम अधिकारी करेंगे।

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