उज्जैन की तर्ज पर धमतरी में निकली महाकाल की शाही-सवारी:20 सालों की परंपरा; इस दिन का इंतजार करते है भक्त

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सावन के अंतिम सोमवार को उज्जैन की तर्ज पर महाकाल की मनोकामना शाही पालकी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में भगवान महाकाल पालकी में विराजमान होकर भक्तों के बीच पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अपने कंधों पर पालकी लेकर शहर भ्रमण कराया। यात्रा के दौरान महाकाल बाबा की जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। भक्तों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की और आरती उतारी। महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों ने घंटों इंतजार किया। बता दें कि उज्जैन के बाद दूसरी जगह धमतरी है जहां महाकाल की सवारी निकलती है। 20 सालों से यह परंपरा चल रही। शहर के इस रुट से निकली यात्रा यात्रा बनियापारा के सिद्धेश्वर महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर टॉकीज रोड, रिसाईपारा, शिव चौक, दुर्गा चौक, कचहरी चौक, बूढ़ेश्वर मंदिर, मराठा पारा, सदर बाजार, मठ मंदिर चौक होते हुए वापस मंदिर पहुंची। बाजे की धुन पर बच्चे भी थिरकते नजर आए। 20 सालों से चल रही परंपरा श्री सिद्धेश्वर महाकालेश्वर मंदिर समिति के तीरथ राज फूटान ने बताया कि यह परंपरा करीब 20 सालों से धमतरी में चली आ रही है। भारत में सिर्फ उज्जैन और धमतरी में ही महाकाल की शाही पालकी यात्रा निकलती है। उन्होंने बताया कि साल में दो बार – महाशिवरात्रि और सावन में यह यात्रा निकाली जाती है। इस वर्ष भक्तों ने महाकाल बाबा से अच्छी बारिश, किसानों की समृद्धि और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की। भक्तों का विश्वास है कि महाकाल उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शाही पालकी का इंतजार करते है भक्त भक्तो ने यह भी बताया कि शाही पालकी यात्रा उनके घर और शहर के मंदिरों से होकर गुजरती है। शहर के लिए बहुत बड़ा सौभाग्य दिन होता है। कई सालों से शाही पालकी का भक्त स्वागत करते आ रहे हैं। वे अपने घरों के बाहर खड़े होकर आरती सजाकर मनोकामना शाही पाल की यात्रा का इंतजार करते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *