नेमरा… जहां जन्म लिया, उसी माटी में विलीन:पार्थिव शरीर को कांधे पर लेकर जैसे श्मशान घाट की ओर बढ़े, अचानक बारिश शुरू हो गई, एक घंटे तक मूसलाधार बारिश होती रही

नेमरा स्थित गुरुजी के पैतृक आवास में अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। स्थिति ऐसी हो गई कि यहां खड़ा रहना मुश्किल हो गया। हजारों लोगों ने भारी मन और नम आंखों से गुरुजी को नमन करते हुए अंतिम जोहार कहा। इसके बाद बेटे हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन सहित अन्य पार्थिव शरीर को कांधे पर लेकर जैसे श्मशान घाट की ओर बढ़े, अचानक बूंदाबांदी शुरू हो गई। घने बादल छाने लगे। चारों ओर पहाड़ों से घिरे नेमरा गांव के उपर छाए काले-काले बादल को देखकर ऐसा लग रहा है मानो वह भी बरसने को व्याकुल हो रहा है। कुछ ही देर में श्मशान घाट पर शव यात्रा पहुंची। पार्थिव शरीर को जैसे ही चिता पर रखा गया, झमाझम बारिश शुरू हो गई। अचानक मुसलाधार बारिश से कुछ देर से अव्यवस्था की स्थिति बन गई,लेकिन हजारों लोग वहां जमे रहे। पूरे राजकीय सम्मान के साथ गुरुजी को विदाई देने की तैयारी की गई। जवानों ने गुरुजी को सलामी दी गई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाज से हेमंत सोरेन ने मुखाग्नि दी। जिस माटी से गुरुजी पैदा हुए उसी माटी में विलीन हो गए। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई बड़े नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने गुरुजी को अंतिम विदाई दी और हेमंत सोरेन व उनकी मां रूपी सोरेन सहित पूरे परिवार से मिलकर ढांढ़स बंधाया। इधर, भीड़ के बीच गुरुजी के घर नेमरा जाने के वक्त करीब दस किमी. तक वाहनों की कतार लग गई। इस दौरान कांग्रेसी नेता रास्ता बनाने का प्रयास करते रहे। एक मुहाने पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का वाहन एवं कारगेड खड़ा था। जिसे हटाने के लिए कांग्रेसियों ने कहा। मगर सुरक्षा कर्मी नहीं हटाए। फिर क्या था कांग्रेस नेताओं एवं मंत्री सोनू के बीच तीखी बहस हो गई। आनन-फानन में रास्ता बनाया गया। इसके बाद राहुल गांधी एवं मल्लिकार्जुन खड़गे निकले। खड़गे गेस्ट के बैठने के लिए बने जगह में बैठ गए। जबकि राहुल गांधी पहले गुरुजी के घर गए और वहां परिजनों, गुरुजी की प|ी रूपी सोरेन से बात की। उन्हें ढ़ाढ़स बंधाया। इसके बाद राहुल गांधी श्मशान घाट पहुंचे जहां पर हेमंत सोरेन से मंत्रणा की बाद में उन्हें गले लगाकर सांत्वना दी। पिता के जाने से मैं भीतर से टूट गया हूं कहा- उनके सपनों के अनुरूप झारखंड को सजाने- संवारने के लिए अपना पल-पल समर्पित करूंगा पिता के निधन के बाद बसंत सोरेन ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट डाला। जिसमें लिखा है कि “मेरे पिता, मेरे पथ प्रदर्शक, दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके जाने से मैं भीतर से टूट गया हूं। उन्होंने केवल मुझे जीवन नहीं दिया, बल्कि मुझे सोचने, लड़ने और समाज के लिए खड़ा होने की ताकत दी। उनका संघर्षमय जीवन झारखंड के आदिवासी समाज, किसानों, मजदूरों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक था। मैंने सिर्फ अपने पिता को नहीं खोया- मैंने अपना सबसे बड़ा संबल, अपनी छाया, अपनी आत्मा का एक हिस्सा खो दिया है। सच कहूं तो अब पिता के बिना मेरा कुछ भी नहीं बचा। जीवन की लड़ाई उन्होंने सिखाई, लेकिन यह लड़ाई अब उनके बिना अधूरी लगती है। उनका आशीर्वाद, उनका संकल्प और उनके आदर्श मेरे जीवन की अंतिम पूंजी हैं। जब तक सांस चलेगी, उनके सपनों के अनुरूप झारखंड को सवांरेंगे। गुरुजी हमेशा दूसरे के लिए जीए, भेदभाव नहीं किया गुरुजी के साथ लंबे समय तक रहे 78 वर्षीय शनिचरवा मांझी ने उनके बारे में विस्तार से बताया। मांझी ने बताया कि गुरुजी पूरी उम्र सभी की सेवा करते रहे। उनकी एक आवाज में सभी लोग साथ आ जाते थे। गुरुजी कभी भी अपने लिए नहीं जीए। कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। पूरी उम्र दूसरे के लिए जीते रहे। उनके जैसा इस धरती में कोई है ही नहीं। आज सब अपने लिए मर रहा है। मगर वे अपने लिए कभी कुछ नहीं सोचा। जब मुख्यमंत्री भी बने तो भी हम मिलते थे। उनके आवाज पर लोग तीर- धनुष लेकर आ जाते थे कि गुरुजी ने बुलाया है। 10 दिन का कार्यक्रम, 3 दिन में छांव को ले जाया जाएगा घर बसंत सोरेन ने किया भावुक पोस्ट… गुरुजी के साथी बोले… गुरुजी का श्राद्ध कर्म 10 दिन का ही होगा। तीन दिन में जो डेथ हो गया, वह हवा में चले जाते हैं। इसलिए उनकी छांव को हमलोग उनके घर ले जाएंगे। 10 दिन में दशकर्म होगा। हमलोगों के समाज में दस दिन का ही कार्यक्रम होता है।

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