तालाब के तल में रहने वाले जीव देते हैं पानी गंदा होने का संकेत

भास्कर न्यूज | कवर्धा कबीरधाम जिले के ग्राम सेवई कछार स्थित फिशरीज कॉलेज ने तालाब में रहने वाले जीव पर रिसर्च किया है। यह रिसर्च कॉलेज के विद्यार्थियों ने सह प्राध्यापक व वरिष्ठ वैज्ञानिक (मत्स्य संसाधन प्रबंधन विभाग) डॉ. निरंजन सारंग के मार्गदर्शन में किया है। इससे पता चला है कि तालाब के तल में रहने वाले जीव भी गंदे पानी का संकेत दे रहे हैं। ये बता रहे हैं कि पानी गंदा होना शुरू हो गया है। रिसर्च के संबंध में डॉ. निरंजन सारंग बताया कि कवर्धा शहर के रेवाबंद तालाब के तल की मिट्टी से पाए जाने वाले 24 प्रकार के जीव के सैंपल लिए गए थे। इन जीव का रिसर्च किया गया, जिसमें से दो जीव संकेत दे रहे हैं कि पानी अब गंदा होना शुरू हो गया है। इन दोनों जीव का नाम मेलानोइड्स ट्यूबरकुलाटा व चिरोनोमस लार्वा है। इनसे अब ये पता चला कि तालाब का पानी गंदा हो रहा है। हालांकि यहां के तालाब में शहर के सीवेज का पानी जमा होता है। ऐसे में पानी गंदा होगा। आमतौर पर पानी की जांच कई प्रकार से की जाती है। अब नए रिसर्च में तालाब के भीतर रहने वाले जीव भी संकेत दे रहे हैं। कॉलेज के विद्यार्थियों ने जुलाई 2021 से लेकर फरवरी 2022 तक यहां से सैंपल लिया था। ये माह में 15 से 15 दिन के भीतर सैंपल लेते थे। इस पूरी प्रक्रिया होने के बाद अब रिसर्च पूर्ण हुआ है। डॉ. सारंग कवर्धा के फिशरीज कॉलेज में सह प्राध्यापक के अलावा फिशरीज पॉलीटेक्निक, राजपुर (धमधा) के प्राचार्य का कार्यभार भी देख रहे हैं। अपने इस शोध पत्र को ऑस्ट्रेलिया में पढ़ा गया 21 से 25 जुलाई तक 20वें विश्व झील सम्मेलन ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में हुआ। जिसमें डॉ. निरंजन सारंग शामिल हुए। उन्होंने इसी शोध पत्र छत्तीसगढ़ के जलीय स्रोतों के जल की गुणवत्ता के लिए जैव सूचकांक के रूप में नितलक जीवों की विविधता का उपयोग विषय का पत्र पढ़ा है। डॉ. सारंग ने बताया कि इस बार ग्रिफीथ विवि ब्रिसबेन में हुए 20वें विश्व झील सम्मेलन में विश्व भर से लगभग 22 देश के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। भारत से चार प्रदेश महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ व राजस्थान के वैज्ञानिकों ने भाग लिया था।

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