रूस-यूक्रेन युद्ध से जिंदा लौटा पंजाब का युवक, सुनाई आपबीती

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान गोलियों की बरसात से जान बचाकर लौटे पंजाब के युवक ने संत सीचेवाल को अपनी आपबीती सुनाई। युवक सर्बजीत सिंह ने बताया कि अप्रैल 2024 में रूस में दो हफ्तों की फौजी ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे यूक्रेन बॉर्डर पर जंग लड़ने भेज दिया गया। सरबजीत ने कहा कि अगर राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल मदद न करते, तो शायद वह कभी घर न लौट पाते। अब यह युवक रूस में लापता 14 भारतीयों की तलाश में फिर मास्को जा रहा है, ताकि वह फौजी कैंपों से उनकी पहचान कर सके। सरबजीत वहां 8 महीने से ज्यादा वक्त बिता चुका है और उसे कई शहरों की जानकारी है। उसने बताया कि वह और कुल 18 लोग कोरियर का काम करने के लिए मास्को गए थे। लेकिन एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें पकड़ कर एक इमारत में ले जाया गया। वहां दस्तावेज तैयार करवाने और मेडिकल चेकअप के बाद 15 दिन की फौजी ट्रेनिंग दी गई और फिर सीधे रूस-यूक्रेन जंग में उतार दिया गया, जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं था। सरबजीत ने कहा कि वहां कभी गाड़ियों में ले जाते थे, तो कभी कई-कई किलोमीटर पैदल चलाया जाता था। 5-5 लोगों की टीमें बनाकर उन्हें फौजी वर्दी पहनाकर हथियारों से लैस कर दिया जाता था। यूक्रेन में उन्हें कदम कदम पर लाशें नजर आती थीं। इनमें कई भारतीय भी थे। कई दिन तक पीने का पानी भी नसीब नहीं होता था। न ही समय पर खाना मिलता था। एक बार तो वह इतना टूट गया कि उसने हैंड ग्रेनेड की पिन निकालकर खुद को खत्म करने की भी कोशिश की। उसने बताया कि वहां जंग के माहौल में पता ही नहीं चलता था कि कहां से गोली या बम आ गिरेगा। वहां उन्होंने मौत को करीब से देखा। वहीं, युवक की व्यथा सुनने के ​बाद संत सीचेवाल ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान रूस में फंसे इन भारतीयों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार से भी इनकी सहायता की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को पूछे गए सवाल के जरिए बताया गया था कि रूस की आर्मी में 13 भारतीयों में से अभी भी 12 लापता हैं। उनकी तलाश के लिए मंत्रालय प्रयास कर रहा है। गौर है कि संत सीचेवाल ने बीते फरवरी में दो लोगों को रूस जाने के लिए टिकटें भी उपलब्ध करवाई थीं, ताकि वे अपने परिजनों की तलाश कर सकें।

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