बलौदा बाजार जिले के किसान इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। पिछले पखवाड़े से मानसून की अनियमितता के कारण खेतों में दरारें पड़ गई हैं। धान की फसल सूखने लगी है। किसानों ने गंगरेल बांध से तत्काल पानी छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला तो इस साल पैदावार में भारी कमी आ सकती है। मानसून के रुकने से खेतों में नमी की कमी हो गई है। धान की रोपाई, निदाई और बियासी जैसे कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। 70% से अधिक खेत सूख चुके हैं। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई या नहरों से पानी नहीं मिला, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बिना पानी के मर रही फसल कई किसान अभी पंप से सिंचाई करके अपनी फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इससे डीजल और बिजली की लागत बढ़ गई है। छोटे किसानों के लिए यह विकल्प महंगा साबित हो रहा है। किसान रघुनंदन लाल वर्मा (गिर्रा) का कहना है कि धान की फसल बिना पानी के मर रही है। अगर एक हफ्ते में पानी नहीं मिला, तो सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी। झड़ी राम कनौजे ने कहा कि प्रशासन जल्द ही नहर में पानी छोड़े। पंप से सिंचाई करने से खर्च दोगुना हो गया है। यह टिकाऊ समाधान नहीं है। खेतों का पानी तेजी से सूखने लगा किसान अखिलेश वर्मा कोसमंदी ने बताया कि उनके खेतों में दरारें पड़ गई हैं। यह स्थिति बहुत गंभीर है। गंगरेल बांध से पानी छोड़ने में देरी हो रही है, जिससे फसलें खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के दौरान खेतों में जरूरत के अनुसार पानी रोके थे। लेकिन बारिश बंद होते ही खेतों का पानी तेजी से सूखने लगा है। इससे खेतों में दरार पड़ने लगी है।


