खबर हटके- चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनने जा रहा:शादी में बुलाकर खाना खिलाने से मना किया; जानिए ऐसी ही 5 रोचक खबरें

चांद पर न्यूक्लियर रिक्टर बनने जा रहा है। वहीं, एक महिला शादी में गई लेकिन उसे खाना खिलाने से मना कर दिया गया। 1. चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर कौन और क्यों बना रहा है?
2. शादी में बुलाकर खाना खिलाने से क्यों मना किया?
3. आखिर कौन है 60 साल न नहाने वाला इंसान?
4. 10 वर्ग मीटर के देश में 3 हजार लोग कैसे बस गए?
5. समुद्र में मिली राक्षस जैसी चीज क्या है? आपने तारे तोड़कर लाने और चांद पर घर बसाने की बात सुनी होगी, लेकिन अमेरिका चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने की तैयारी कर रहा है। NASA के एक्टिंग एडमिनिस्ट्रेटर शॉन डफी ने हाल ही में इसकी घोषणा की है। अमेरिका का मानना है कि रूस और चीन चांद पर कब्जा करके अन्य देशों के लिए नो एंट्री जोन घोषित कर सकते हैं। अब अमेरिका उनसे पहले वहां इंसानों को बसाने की प्लानिंग कर रहा है। इंसान रहेंगे तो उनकी कुछ जरूरतें भी होंगी। चांद पर 2 हफ्तों की रात और 2 हफ्तों का दिन होता है। ऐसे में सौर ऊर्जा पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रह सकते। इस वजह से अमेरिका 2030 तक चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाकर बिजली बनाने की प्लानिंग कर रहा है। इसके लिए टेंडर भी निकाल दिया गया है। कंपनियों को 100 किलोवाट बिजली पैदा करने वाला रिएक्टर बनाने के लिए बोली लगानी है। हालांकि, यह पृथ्वी पर लगने वाले नॉर्मल रिएक्टर से 20 गुना छोटा है फिर भी अंतरिक्ष में रेडियोएक्टिव पदार्थ भेजना काफी जोखिम भरा है। जरा सोचिए, आपको किसी शादी में बुलाया जाए। आप फंक्शन अडेंट करें और जैसे ही खाने की प्लेटों की ओर बढ़ें तो कह दिया जाए कि आपका नाम डिनर करने वालों की लिस्ट में नहीं है। स्कॉटलैंड में एक महिला के साथ ऐसा ही हुआ। सोशल मीडिया साइट रेडिट पर उसने बताया, ‘मैं एक कलीग की शादी में पहुंची, चर्च सेरेमनी अडेंट की, तस्वीरें भी खिंचवाईं। सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन जब खाने की टेबल पर पहुंची तो मुझसे कहा गया कि मैं सिर्फ सेरेमनी और ड्रिंक्स ले लिए इनवाइटेड थी, डिनर के लिए नहीं। मुझे बहुत बुरा लगा।’ लेकिन महिला भी कम चालाक नहीं थी। उसने आगे बताया, ‘मैंने शादी में गिफ्ट के साथ 50 पाउंड स्टर्लिंग यानी करीब 5800 रुपए भी दिए थे। इस घटना के बाद मैंने गिफ्ट तो दे दिया लेकिन पैसे वापस मांग लिए।’ अच्छा बताइए, आप बिना नहाए ज्यादा से ज्यादा कितने दिन रह सकते हैं। 2 दिन, 4 दिन, 10 दिन… बहुत ज्यादा 1 महीना। लेकिन एक शख्स ने बिना नहाए 60 साल गुजार दिए। हम बात कर रहे हैं ईरान के सन्यासी अमू हाजी की। उन्हें लगता था कि नहाने से वे बीमार हो जाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही। नहाने के कुछ दिनों बाद वे काफी बीमार हो गए और कुछ महीनों में ही उनकी मौत हो गई। अमू हाजी को दुनिया का सबसे गंदा इंसान कहा जाता था। न नहाने के अलावा भी इसकी कई वजहें थीं। अमू सड़क पर मरे जानवरों का ही मांस खाते थे, गंदे डिब्बों में पानी पीते थे, बाल काटने के बजाय उन्हें जला दिया करते थे। लेकिन हैरानी की बात ये थी, इस सबके बावजूद वे ज्यादातर समय हेल्दी ही रहते थे। जार्ज क्रूकशैंक ने दो दोस्तों के साथ मिलकर अपने घर के बैकयार्ड (घर के पीछे का हिस्सा) को अलग देश घोषित कर दिया। उसने खुद को वहां का राजा घोषित कर दिया। 10 वर्ग मीटर में बना यह देश अब 80 हेक्टेयर यानी करीब 0.75 वर्ग किमी में फैल चुका है और इसके करीब 3 हजार नागरिक हैं। खास बात यह है कि इसके ज्यादातर नागरिक कभी अपने देश आए ही नहीं। इतना ही नहीं वे दुनिया भर के 100 से ज्यादा देशों में फैले हुए हैं। हम बात कर रहे हैं माइक्रोनेशन ‘एम्पायर ऑफ अटलैंटियम’ की। असल में माइक्रोनेशन ऐसी जगह होती है जिसे उसका मालिक एक स्वतंत्र देश घोषित कर देता है। हालांकि, इन्हें कानूनी तौर पर अलग देश के रूप में मान्यता नहीं मिलती। ये किसी न किसी देश का हिस्सा ही होते हैं। पश्चिमी देशों में यह आम बात है। इनकी अपनी सरकार, करेंसी, डाक टिकट, संविधान वगैरह भी होता है। माइक्रोनेशन प्रतीकात्मक या शौकिया तौर पर बनाए जाते हैं इसलिए वे देश इस पर आपत्ति नहीं करते जिनका ये असल में हिस्सा होते हैं। अटलैंटियम भी इसी तरह का एक माइक्रोनेशन है जो ऑस्ट्रेलिया में सिडनी से करीब 350 किलोमीटर दूर गांव का इलाका है। यह वेटिकन सिटी से दोगुना है। इसके नागरिकों ने ऑनलाइन नागरिकता ली है। अटलैंटियम को भी एक प्रतीक के तौर पर बनाया गया है। इसके राजा का मानना है कि दुनिया में बॉर्डर नहीं होने चाहिए। लोगों को दुनिया की किसी भी जगह बिना रोक-टोक आने-जाने और बसने की आजादी होनी चाहिए। दुनिया भर में तरह-तरह के जीव होते हैं। इनमें से कई जीवों की खासियत हमें अचंभे में डाल देती है। ऐसी ही एक मछली है टेलिस्कोप फिश। इसकी आंखों से लाइट निकलती है। टेलिस्कोप फिश समुद्र में 500 से 3 हजार मीटर यानी करीब 3 किलोमीटर तक की गहराई में पाई जाती है। महासागरों की औसतन गहराई 3700 मीटर होती है। सूरज की रोशनी सिर्फ 1000 मीटर तक ही पहुंचती है। ऐसे में टेलिस्कोप फिश की यह क्षमता उसे गहरे समुद्र में शिकार करने में मदद करती है। इनकी आंखें बायोलुमिनसेंसिक होती हैं यानी ये मछलियों की आंखें गहरे समुद्र में केमिकल रिएक्शन के जरिए लाइट पैदा करती हैं। किसी भी तरह की रोशनी से हीट भी पैदा होती है, लेकिन इस तरह से पैदा हुई लाइट में 20% तक कम हीट होती है। इस वजह से इस तरह की लाइट को ‘कोल्ड लाइट’ भी कहा जाता है। तो ये थीं आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ अन्य दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

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