विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली पर आदिवासी स्वयंसेवक तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए आदिवासी स्वयंसेवक परिषद का गठन किया गया है। सदस्यता अभियान रांची एवं लातेहार में शुरू किया गया है। आदिवासी स्वयंसेवक परिषद के द्वारा मुख्य रूप से दो प्रकार के कैडर तैयार किए जाएंगे। पहला फुल टाइम कैडर और दूसरा पार्ट टाइम कैडर। ये कैडर गांव-गांव में जाकर लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करेंगे। जो लोग आदिवासी दर्शन को छोड़कर दूसरे दर्शन से प्रभावित होकर उसकी ओर जा रहे हैं, वैसे लोगों को मूल धर्म दर्शन की ओर लौटाना, आदिवासियों की रीति रिवाज, कला-संस्कृति, भाषा एवं जल जंगल जमीन की रक्षा करना, आदिवासी महापुरुषों के विरासत का संरक्षण एवं उनके द्वारा बताए रास्तों पर चलना, आदिवासी समाज को शिक्षित करना एवं आर्थिक रूप से विकसित करना, आदिवासी समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे डायन बिसाही के प्रति लोगों को जागरूक करना और इस बुराई को दूर करना, पांचवी अनुसूची एवं सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पैतृक संपत्ति पर आदिवासी महिलाओं को अधिकार दिए जाने के मुद्दे पर चर्चा कर ठोस कदम उठाना आदि शामिल होगा। इसके साथ ही आदिवासियों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए आदिवासी सेना का गठन किया गया है। युवा जल, जंगल, जमीन से जुड़ें इसका संरक्षण करें : चमरा लिंडा मुख्य अतिथि के तौर पर झारखंड सरकार में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा मौजूद हुए। उन्होंने छात्रों को इस दिन के महत्व के बारे में बताया। संस्कृति को बचाने पर जोर दिया। वहीं, विशिष्ट अतिथि के तौर पर साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित कवयित्री पार्वती तिर्की और केंद्रीय सरना समिति के सचिव संतोष तिर्की उपस्थित थे। शिबू सोरेन को भारत र| दिया जाए विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड आदिवासी विकास समिति ने बहू बाजार चौक में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वहीं झारखंड अलग राज्य आंदोलन को मुकाम पर पहुंचाने वाले दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन को विशेष रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं उनके संघर्ष को स्मरण किया गया। मौके पर उन्हें भारत र| देने की मांग की गई। मूलनिवासी दिवस के रूप में मनाया जाए जनजातीय सुरक्षा मंच ने विश्व आदिवासी दिवस मूलनिवासी दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा जो 46 अनुच्छेद हमें 2007 में मिले, वे भारत के संविधान में हमें पहले से ही प्राप्त हैं। मूल निवासी दिवस के स्थान पर विश्व आदिवासी दिवस मनाना चर्च का षड्यंत्र है। आज ही के दिन हमारे कई जनजातियों का समूल नाश कर दिया गया और आज हम मूल निवासी के स्थान पर विश्व आदिवासी दिवस मना रहे हैं, इसको समझने की आवश्यकता है। अमेरिका में हमारे जनजातीय समुदाय के जिन लोगों का समूल नाश किया गया, वैसे लोगों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा एवं शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंच के सोमा उरांव, संदीप उराव, जय मंगल उरांव, गणेश नायक, सुनील टोप्पो, शंकर टोप्पो, करण कुमार, राजू उरांव, गुड़िया कुमारी आदि उपस्थित थे। प्रकृति से जीवन थीम पर पेंटिंग, डिजिटल आर्ट, स्लोगन कंपीटिशन हुए कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए कई कंपीटिशन भी आयोजित किए गए थे। इसमें प्रकृति से जीवन थीम पर पेंटिंग, डिजिटल आर्ट, स्लोगन कंपीटिशन हुए। जिसमें लगभग 50 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। विजेताओं को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। इसके अलावा कॉलेज परिसर में झारखंडी कुजिन और परिधान के स्टॉल भी लगाए गए। कार्यक्रम में पारंपरिक वस्त्र में पहुंचीं युवतियां। दो तरह के कैडर बनाए जाएंगे, एक पार्ट टाइम व दूसरा फुल टाइत राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष रवि तिग्गा के नेतृत्व में हरमू मैदान से कार्तिक उरांव चौक तक जुलूस निकाला गया। इस मौके पर कार्तिक उरांव, वीर बुधु भगत एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में मार्च में पहुंचे। महिलाएं लाल पाढ़ साड़ी और पुरुष धोती-कुर्ता गमछा में शामिल हुए। अगुवाओं के द्वारा आदिवासी हक के विषय में मार्च में शामिल लोगों को जानकारियां दी गईं। इसके जरिए सरना धर्म कोड की मांग केंद्र सरकार से की गई। संत जेवियर्स में आदिवासी दिवस 35 छात्रों के समूह ने हो नृत्य में धान रोपाई, कटाई, शिकार जैसे कामों को दिखाया भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर जुटे लोग राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा ने किया मार्च सिटी रिपोर्टर | रांची संत जेवियर्स कॉलेज के ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन (एआईसीयूएफ) और आदिवासी युवा चेतना मंच की ओर से शनिवार को कॉलेज के फादर सी डी ब्राउवर मेमोरियल अॉडिटोरियम में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर सभी छात्र-छात्राएं पारंपरिक लाल पाड़ साड़ी और धोती कुर्ता बंडी पहन कार्यक्रम में उत्साह के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरूवात में सभी आदिवासी अगुवों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद स्टूडेंट्स ने मंच पर झारखंड राज्य के अलावा पूरे देश के आदिवासियों की संस्कृति को प्रस्तुत किया। ढोल, मांदर, नगाड़ा की थाप पर पारंपरिक परिधान में सजे छात्र-छात्राओं ने जनजातियों की संस्कृति को प्रस्तुत किया। कॉलेज के लगभग 35 छात्र-छात्राओं ने हो नृत्य में धान रोपाई, कटाई, शिकार और कई क्रियाकलापों को दिखाया। इसके बाद छात्रों ने छत्तीसगढ़ के उरांव समाज के नृत्य की प्रस्तुति दी। आदिवासी समाज के लोगों ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा का प्रण लिया।


