जिले के बजरंगगढ़ में अतिक्रमणकारियों पर शनिवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। माफियाओं ने सरकारी जमीन पर ढाबा बनाकर कब्जा किया था। जमीन की कीमत लगभग एक करोड़ है। अतिक्रमणकारियों को पता चला कि प्रशासन कार्रवाई कर सकता है, तो उन्होंने रातों रात ढाबे को गौशाला में बदल दिया। दीवारों पर ढाबे की जगह गौशाला लिख दिया गया। बता दें कि शहर से सात किलोमीटर दूर बजरंगगढ़ इलाके में सरकारी जमीन सर्वे क्रमांक 937 में 0.063 हेक्टेयर जमीन पर एक परिवार ने कब्जा किया हुआ था। बजरंगगढ़ के रहने वाले प्रेमनारायण भट्ट के पुत्र चंद्रप्रकाश, संदीप, संतोष, सुनील, सतीश ने जमीन पर ढाबा बना लिया था। साथ ही तार फेंसिंग भी कर ली थी। उन्होंने सरकारी रास्ते पर भी लोहे का गेट लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। इस मामले की शिकायत दीपक पुत्र मुन्नालाल सुमन ने आवेदन के जरिए की थी। तहसीलदार गुना ग्रामीण कमल सिंह मंडेलिया ने प्रकरण दर्ज कर पटवारी से रिपोर्ट मांगी। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस परिवार ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर ढाबा बना लिया है। साथ ही सरकारी रास्ते को भी गेट लगाकर बंद कर दिया है। 13 दिसंबर को तहसीलदार ने आदेश करते हुए कहा था कि परिवार खुद ही इस जमीन को खाली कर दे, नहीं तो प्रशासन अपनी कार्रवाई करेगा। साथ ही उन पर 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया था। SDM की मौजूदगी में चला बुलडोजर तहसीलदार के आदेश के बाद भी परिवार ने जमीन खाली नहीं की। शनिवार सुबह SDM शिवानी पांडे के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस बल मौके पर पहुंचा। JCB से ढाबे को तोड़ दिया गया। साथ ही फेंसिंग और सरकारी रास्ते प लगाए गए गेट को भी तोड़कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गए। इस दौरान प्रभारी CSP भरत नौटिया, तहसीलदार गुना ग्रामीण कमल मंडेलिया सहित आरआई, पटवारी, होमगार्ड के जवान मौजूद रहे। ढाबे को गौशाला में बदलने का प्रयास तहसीलदार कमल मंडेलिया ने बताया कि अतिक्रमणकारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए कई हथकंडे अपनाए। इस जगह पर महाकाल ढाबा चलता था। जब उन्हें पता चला कि आज प्रशासन कार्रवाई करेगा, तो उन्होंने रातों रात ढाबे को गौशाला में बदलने का प्रयास किया। ढाबे की दीवारों पर माधव गौशाला लिख दिया। हालांकि, उनकी यह चालाकी कामयाब नहीं हो पाई। प्रशासन की टीम ने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।


