जन्मदिन के दिन ही शहीद हुए जवान हरिकृष्ण:6 साल से जाट रेजीमेंट में थे तैनात, 12 दिन पहले छुट्‌टी पूरी कर पहुंचे थे लेह

जम्मू कश्मीर के लेह में ड्यूटी के दौरान हनुमानगढ़ के पल्लू तहसील के हमीरदेसर गांव का जवान शहीद हो गया। शहीद जवान हरिकृष्ण का शुक्रवार को 25वां जन्मदिन था। जवान 12 दिन पहले ही घर से छुट्टी पूरी कर अपनी ड्यूटी पर लेह पहुंचा था। सैनिक का पार्थिव देह गांव पहुंचने पर पूरे गांव में मातम छा गया। जवान हरिकृष्ण 6 साल से जाट रेजीमेंट में तैनात थे। जवान ने कल ही अपनी उम्र के 25 वर्ष पूरे किए थे। जवान हरिकृष्ण अविवाहित थे। आज उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने शहीद के पार्थिव देह पर फूल चढ़ाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान भारत माता की जय और शहीद हरिकृष्ण अमर रहे के नारों से गूंज उठा। तीन बहन-भाइयों में सबसे छोटे थे हरिकृष्ण
शहीद जवान हरिकृष्ण के चचेरे भाई अनिल खीचड़ ने बताया कि जवान के पिता बुधराम किसान हैं। जिन्होंने खेती करके बेटे को पढ़ाया और देश सेवा में भेजा। शहीद की मां गुड्डी देवी ग्रहणी हैं। बड़ी बहन सुनीता विवाहिता हैं, जो अपने ससुराल में रहती हैं। एक बड़ा भाई ओमप्रकाश खेती करता है और अपने पिता का हाथ बंटाता है। 2018 में हुई थी पहली ज्वाइनिंग
चचेरे भाई अनिल खीचड़ ने बताया कि हरिकृष्ण साल 2018 में भर्ती हुए थे। अब तक जवान ने लेह के अलावा सियाचिन में भी अपनी ड्यूटी निभाई है। खीचड़ ने बताया कि भाई हरिकृष्ण पिछले कुछ समय से ड्यूटी के दौरान ही बीमार हो गए थे। जिसके बाद से बीमार चल रहे थे। 27 दिसंबर को उसके शहीद होने की दुखद सूचना प्राप्त हुई। एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ और दिल्ली में हुआ इलाज
चचेरे भाई अनिल ने बताया कि लेह में ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने के चलते भाई हरिकृष्ण को भारतीय सेना ने एयरलिफ्ट के जरिए चंडीगढ़ अस्पताल में रखा और फिर दिल्ली भी इलाज के लिए लेकर गए, लेकिन हमारा भाई बच न सका और शहीद हो गया। अनिल ने कहा कि जिले और इलाके के लिए गौरव और शौर्य का पल है, लेकिन एक भाई खोया है, इसका हमें दुख भी है। एथलीट के रूप में थी पहचान, बटालियन में सबके थे लाडले
साथी सैनिक मुकेश ने बताया कि हरिकृष्ण जाट रेजीमेंट में सैनिक थे। जिसकी सर्विस 6 साल 12 दिन की थी। मुकेश ने बताया कि अच्छे एथलीट के रूप में हरिकृष्ण की रेजिमेंट में पहचान थी। जो क्रॉस कंट्री गेम में पार्टिसिपेट करते थे। ऐसा नहीं था कि लेह में पहली बार पोस्टिंग हुई थी। उससे पहले भी वो लेह, सियाचिन और ग्लेशियर जैसे क्षेत्रों में अपनी ड्यूटी कर चुके थे। कोई भी ड्यूटी के लिए हमेशा आगे ही रहते थे। साथी मुकेश ने बताया कि पीछे क्रॉस कंट्री बटालियन की प्रतियोगिता में टीम फर्स्ट रही थी। उस टीम में हरिकृष्ण भी शामिल थे। हरी कृष्ण बटालियन में सबके लाडले थे। जन्मदिन के दिन हमने साथी खो दिया। जो सबसे बड़े दुख की बात है।

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