चाईबासा| पीरामल फाउंडेशन के सामंजस्य से स्वयं सहायता समूह की बैठक का आयोजन कर नशा निवारण समिति का गठन एवं सर्वेक्षण किया गया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने चिंता व्यक्त किया कि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें स्थानीय मादक पेय सबसे आम हैं। अन्य नशीले पदार्थों में गांजा और व्यावसायिक रूप से बेची जाने वाली शराब भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आस-पास की छोटी दुकानें स्थानीय शराब बेच रही हैं। सदस्यों ने नशीले पदार्थों के सेवन को कम करने और समुदाय में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से समिति की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने की इच्छा व्यक्त की। बैठक के दौरान क्षेत्र में नशीले पदार्थों के सेवन के पैटर्न पर एक सर्वेक्षण भी किया गया।


