चंडीगढ़ के 22 गांवों के लोग वर्षों से बंजर पड़ी जमीनों के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करने की मांग कर रहे थे, ताकि इन जमीनों का कृषि कार्य के बजाय शहर के विकास में उपयोग हो सके। समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सत्ता में रही सरकारों ने इस संबंध में आश्वासन भी दिए, लेकिन अब तक यह मांग सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित रही है। चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संसद में इस मुद्दे पर सवाल पूछा तो केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि न तो चंडीगढ़ के लिए कोई लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई जा रही है और न ही इस पर विचार किया जा रहा है। गांवों के लोगों का कहना है कि उनकी वैध आकांक्षाओं को बार-बार ठेस पहुंचाई जा रही है। ठीक वैसे ही जैसे चंडीगढ़ से जुड़े अन्य विकास कार्यों और परियोजनाओं में देखा गया है। ग्रामीणों ने अब प्रशासनिक और शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई है, ताकि उनकी जमीनों और भविष्य का सही इस्तेमाल हो सके। पहले की तर्ज पर लाना चाहिए लैंड पूलिंग- सीनियर डिप्टी मेयर चंडीगढ़ नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर जसवीर सिंह बंटी ने कहा कि लैंड पूलिंग जैसे हरियाणा में है, इसी तरह चंडीगढ़ में भी लागू होनी चाहिए। क्योंकि जिन किसानों की जमीन पर चंडीगढ़ शहर बसा है उन्हें तो कुछ नहीं मिला। इसलिए पहले की तर्ज पर इसे लाना चाहिए, ताकि चंडीगढ़ के किसानों का फायदा हो सके।


