नीति आयोग का मेगा टिंकरिंक डे:राज्य के 300 से ज्यादा स्कूल लाइव जुड़े, स्टूडेंट्स ने घंटेभर में तैयार किया वैक्यूम क्लीनर का वर्किंग मॉडल

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत मंगलवार को मेगा टिंकरिंग डे मनाया गया। इस मेगा डे में 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 10,000 से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्कूलों के 4,73,350 छात्र एक साथ जुड़े। छत्तीसगढ़ से भी इस मेगा ड्राइव में लगभग 300 से ज्यादा ATL स्कूल जुड़ें। वहीं राजधानी रायपुर से इस मेगा मिशन में 27 ATL स्कूल जुड़े। इनमें 18 सरकारी और 9 निजी स्कूल शामिल हैं। इस मौके पर AIM टीम के सदस्यों के गाइडेंस में अलग-अलग स्कूलों के स्टूडेंट्स ने मिलकर वैक्यूम क्लीनर बनाया। टाटीबंध स्थित एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर अरूणा गोपू ने बताया कि ड्राइव में AIM मेगा ड्राइव में पार्टिशिपेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया था। स्टूडेंट्स को नीति आयोग की टीम ने ऑनलाइन गाइडेंस दिया। इसके अलावा ग्राउंड हेल्प के लिए 10 वॉलंटियर्स और चार मेंबर्स की स्पेशल टीम बनाई गई थी, जिनमें स्कूल टीचर्स शामिल थे। पूरा कार्यक्रम सुबह 10 से 11 बजे तक चला। 6वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स का इसमें पार्टिशिपेशन रहा। अब पढ़िए टीचर और स्टूडेंट्स ने इस मेगा ड्राइव को लेकर क्या कहा- नवाचार को जमीनी स्तर पर लाने की पहल कार्यक्रम के दौरान AIM के मिशन निदेशक दीपक बागला ने कहा- “प्रधानमंत्री के विकसित भारत विजन के अनुरूप, मेगा टिंकरिंग दिवस 2025 जमीनी स्तर पर नवोन्मेष की शक्ति का प्रमाण है। दुनिया के किसी भी देश ने स्कूल स्तर पर इस पैमाने पर इनोवेशन को नहीं बढ़ाया है। आज हमारी कक्षाओं में भविष्य का निर्माण हो रहा है।” स्कूलों में 10,000 से ज्यादा ATL लैब AIM की स्थापना के बाद से देशभर के स्कूलों में 10,000 से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब बनाई जा चुकी हैं। इनमें 3D प्रिंटर, रोबोटिक्स किट, IoT डिवाइस जैसे मॉडर्न टूल्स उपलब्ध हैं, जिससे मिडिल से हाई स्कूल के छात्र टेक्नोलॉजी का प्रैक्टिकल अनुभव ले रहे हैं और असल दुनिया की समस्याओं को हल करने की स्किल सीख रहे हैं। सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, राष्ट्रीय इनोवेशन मूवमेंट AIM का मानना है कि मेगा टिंकरिंग दिवस सिर्फ एक प्रोजेक्ट-बिल्डिंग सत्र नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन की शुरुआत है। आने वाले शैक्षणिक सत्र में टिंकरिंग गतिविधियों के लिए इसे लॉन्च पैड के रूप में देखा जा रहा है, जो छात्रों, शिक्षकों, मेंटर्स, उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योग जगत को जोड़ेगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *