छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में 9 गांवों के ग्रामीणों ने अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने नहरपाली स्थित एक निजी कंपनी के मुख्य गेट के सामने धरना देना शुरू कर दिया है और साफ़ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी की नीतियां जनविरोधी हैं। वे प्रदूषण, रोजगार, और CSR फंड के सही उपयोग सहित कई मुद्दों को लेकर नाराज़ हैं। आंदोलन में सिंघनपुर, नहरपाली, कुरूभांठा, सलिहाभांठा, लोढ़ाझर, बिलासपुर, रक्सापाली, तिलाईपाली और भूपदेवपुर गांवों के लोग शामिल हैं। मंगलवार सुबह से ग्रामीण टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि कंपनी ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को रोजगार देने, प्रदूषण नियंत्रण और गांवों के विकास के लिए CSR फंड खर्च करने जैसे वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। धरना स्थल पर तैनात पुलिस बल भूपदेवपुर थाना प्रभारी संजय नाग ने बताया कि ग्रामीण अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन को समाप्त करने के लिए समझाइश दी गई है, लेकिन ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए पुलिस बल मौके पर तैनात है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। ये है सात सूत्रीय मांगें – भू-विस्थापितों को आदर्श भू-अधिग्रहण संहिता के तहत स्थायी नौकरी, सेवानिवृत्ति और मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी को नौकरी देने की गारंटी मिले। – पूर्व में कंपनी से निकाले गए मजदूरों को बिना शर्त दोबारा काम पर रखा जाए। – विस्थापितों को आदर्श पुनर्वास नीति के अनुसार सभी लाभ दिए जाएं। – सिंघनपुर, नहरपाली, सलिहाभांठा सहित नौ गांवों में मेडिकल टीम और एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। – क्षेत्र में फैले धूल, धुआं और डस्ट पर कड़ी निगरानी रखी जाए और प्रभावी रोकथाम की जाए। – कंपनी द्वारा कब्जे में ली गई WBM सड़कों को मुक्त किया जाए। – राजस्व विभाग के निरीक्षण के आधार पर किसानों को फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।


