ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन यानी ONGC लिमिटेड का वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मुनाफा सालाना आधार (YoY) पर 2% गिरकर ₹9,804 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹9,974 करोड़ रहा था। ONGC के ऑपरेशन से कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू यानी आय में सालाना आधार पर 4% की गिरावट आई है। कंपनी का FY26 की पहली तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹1.63 लाख करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही यानी FY25 की पहली तिमाही में रेवेन्यू ₹1.69 लाख करोड़ रहा था। ONGC ने आज यानी 13 अगस्त को पहली तिमाही और सालाना नतीजे जारी किए हैं। FY26 की पहली तिमाही में ONGC का मुनाफा 2% घटा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। क्या होता है स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड? कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कंसॉलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। यहां, ONGC की 1 होल्डिंग कंपनी, 7 सब्सिडियरी, 5 जॉइंट वेंचर और 3 एसोसिएट हैं। इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कॉन्सोलिडेटेड कहा जाएगा। वहीं, ONGC के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा। ONGC का शेयर एक साल में 29% गिरा ONGC का शेयर आज 1.51% बढ़कर ₹239.07 पर कारोबार कर रहा है। पिछले एक साल में कंपनी का शेयर 29% गिरा है। बीते 6 महीने में शेयर 2% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 3.01 लाख करोड़ रुपए है। 2010 में ONGC को महारत्न का दर्जा मिला था महारत्न ONGC क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की भारत की सबसे बड़ी कंपनी है, जो भारतीय घरेलू उत्पादन में लगभग 71% का योगदान देती है। क्रूड ऑयल वह रॉमटेरियल है जिसका उपयोग आईओसी, बीपीसीएल, एचपीसीएल और एमआरपीएल जैसी डाउनस्ट्रीम कंपनियां पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, नेफ्था और कुकिंग गैस एलपीजी जैसे पेट्रोलियम उत्पादों का प्रोडक्शन करने के लिए करती है। ONGC की स्थापना पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में की गई थी। 1955 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत ऑयल एंड गैस डिविजन के रूप में ONGC की नींव रखी गई थी। कुछ महीने बाद इसे ऑयल और नेचुरल गैस डायरेक्टरेट में बदल दिया गया। 14 अगस्त 1956 को डायरेक्टरेट को कमीशन में बदल दिया गया और इसका नाम ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन रखा गया। 1994 में ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन को एक कॉर्पोरेशन में परिवर्तित कर दिया गया और 1997 में इसे भारत सरकार ने नवरत्नों में से एक के रूप में मान्यता दी। इसके बाद साल 2010 में इसे महारत्न का दर्जा दिया गया।


