प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि हरमू रोड में आध्यात्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की मुरली कोई साधारण बांसुरी नहीं, बल्कि दिव्य गीता का ज्ञान है, जो आत्मा को पवित्र और सशक्त बनाती है। ब्रह्मा मुख से भगवान शिव द्वारा सुनाई जाने वाली यह मुरली तीनों लोक, तीनों काल, चार युग और चौरासी जन्मों का मर्म समझाती है। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण-राधा और गोप-गोपियों की झांकी, नृत्य व रास प्रस्तुति हुई। बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में मन मोह लिया। दो घंटे तक सहज राजयोग अभ्यास के बाद सभी ने काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार त्यागने का संकल्प लिया।


