सरहद पर रौशनी, नफरत पर ताला:30वें हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन में आतंकवाद नशा रोकने और रिश्ते सुधारने का दिया संदेश

भास्कर न्यूज | अमृतसर अमृतसर में हिंद–पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च अकादमी, सा़फमा, पाकिस्तान–इंडिया पीपल्स फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच ने, सरबत दा भला ट्रस्ट, नामधारी दरबार और विरसा विहार के सहयोग से 30वां हिंद–पाक दोस्ती सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन की शुरुआत में 1947 के बंटवारे और पहलगाम की घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने दोनों देशों के बीच अमन, भाईचारा और स्थायी शांति की वकालत करते हुए आतंकवाद और सरहद पार से आने वाले नशे की सख़्त निंदा की और रोकथाम की मांग रखी। फोकलोर रिसर्च अकादमी के अध्यक्ष रमेश यादव ने कहा कि अमन पसंद लोग मौजूदा हालात में भी मेल–मिलाप की कोशिश कर रहे हैं, और माहौल सुधरना दोनों देशों के हित में है। मंच के महासचिव सतनाम सिंह मानक ने विभाजनकारी राजनीति का विरोध करते हुए कहा कि पंजाब की सोच ‘सरबत दा भला’ और भाईचारे पर आधारित है, जिसे सांप्रदायिकता स्वीकार नहीं। ओपी शाह ने ज़ोर दिया कि रिश्ते बातचीत से सुधर सकते हैं, वरना जम्मू–कश्मीर के लोगों का जीवन अंधकार में रहेगा। किसान नेता रमिंदर सिंह ने कहा कि दक्षिण एशिया में खुला व्यापार शुरू हो तो 30 बिलियन डॉलर का विकास संभव है। इंदू धवन ने कहा कि जंग इंसानियत की दुश्मन है, जबकि डॉ. कुलदीप सिंह और सतनाम चाना ने परमाणु युद्ध के खतरे पर चिंता जताई। प्रो. बावा सिंह ने सुझाव दिया कि भारत–पाक की सीमाएं अमेरिका–कनाडा की तरह नरम हों ताकि खुला व्यापार हो सके। गुरबाज सिंह छीना, डॉ. हरजीत कौर और अन्य वक्ताओं ने धर्म और भाषा के आधार पर फैलाई जा रही नफरत की निंदा की। सम्मेलन का संचालन प्रो. सुरजीत जज ने किया, जिन्होंने पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद और नशे के खिलाफ सख्त शब्दों में आवाज़ उठाई। इस मौके फोकलोर रिसर्च अकादमी का वार्षिक मैगज़ीन ‘पंज–पानी’ जारी किया गया और सचिव कमल गिल द्वारा घोषणा–पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसे मौजूद किसानों, बुद्धिजीवियों और अमन पसंद लोगों ने हाथ उठाकर मंज़ूर किया। इस मौके किसान नेता डॉ. सतनाम सिंह, जगतार सिंह करमपुरा, करतार सिंह, परमिंदर सिंह माहल, जतिंदर सिंह छीना, काबल सिंह छीना, अरविंदर सिंह, कुलविंदर सिंह, हरजीत सिंह सरकारिया, सतीश झींगण, हरीश साबरी, दिलबाग सिंह सरकारिया, सुखदेव सिंह, ओंकार सिंह राजाताल, एस. प्रषोतम, भूपिंदर सिंह संधू, धर्मिंदर सिंह ओलख, गुरबाज सिंह छीना, डॉ. सरघी, डॉ. हरजीत कौर समेत बड़ी संख्या में किसान नेता और विद्यार्थी मौजूद रहे। सम्मेलन में पारित मुख्य प्रस्ताव . आतंकवाद और तनाव खत्म करने की अपील – पहलगाम हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत और पाकिस्तान से तुरंत बातचीत शुरू करने, भड़काऊ बयानबाजी रोकने और पाकिस्तान से आतंकवादी संगठनों व नशा-हथियार तस्करों को मदद न देने की मांग। . अल्पसंख्यकों की सुरक्षा – तीनों देशों में अल्पसंख्यकों पर हमले और जबरन धर्म परिवर्तन रोकने, 1950 के नेहरू–लियाकत अली समझौते की भावना के अनुसार सुरक्षा और भेदभाव समाप्त करने की मांग। . सीमा और व्यापार खोलना – अटारी-वाघा सीमा से व्यापार और लोगों की आवाजाही फिर शुरू करने, वीजा जारी करने और करतारपुर कॉरिडोर को सिख श्रद्धालुओं के लिए खोलने की मांग। . पीस पार्क बनाना – बंटवारे में मारे गए 10 लाख लोगों की याद में अटारी-वाघा और भारत–बांग्लादेश सीमा पर ‘पीस पार्क’ बनाने की सिफारिश। . अमन के समर्थकों को वीजा सुविधा – शांति के लिए काम करने वाले संगठनों, कलाकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को आसानी से वीजा देने की मांग।

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