प्रदेश में एनवायरनमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (ईसी) के लिए परेशान हो रहे खनन कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 10 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर राज्य स्तर पर पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण का गठन कर दिया है। प्राधिकरण की सहायता के लिए प्रदेशभर में 4 विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (सिया) का गठन किया है। ये समितियां अगले साढ़े तीन माह में प्रदेश में करीब 23 हजार खदानों की ईसी की जांच करेंगी। इनमें उदयपुर जोन की करीब 10 हजार 600 माइंस की फाइलें शामिल हैं। बता दें कि पर्यावरण संबंधी जांच कमेटी गत 12 अक्टूबर को भंग होने के बाद प्रदेश में खदानों की ईसी नहीं होने से इनके बंद होने का संकट गहरा गया था। इससे लाखों लोगों के बेरोजगार होने की भी आशंका थी। दैनिक भास्कर ने आमजन की इस समस्या को 3 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद सरकार ने यह राहत दी है। विभाग के शासन सचिव भी चेता चुके खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने गत 28 नवंबर को आदेश जारी किया था। इसमें कहा था कि प्रदेश में संचालित खदानों की लीज के लिए 31 मार्च, 2025 तक सिया कमेटी से ईसी का पुनर्निरीक्षण करवाना होगा। ऐसा नहीं करने की स्थिति में 31 मार्च के बाद उन्हें किसी भी तरह के खनन कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पालना नहीं करने वाले खनन पट्टों और क्वारी लाइसेंस को खत्म करने की कार्रवाई होगी। इस बार जोन के आधार पर कमेटी नहीं, जिलों को 4 हिस्सों में बांटा सुप्रीम कोर्ट मार्च-2025 तक की दे चुका डेडलाइन, बिना जांच वाली खानें होंगी बंद सुप्रीम कोर्ट ने ईसी जांच के लिए मार्च-2025 तक की डेड लाइन दी है। जिन खदानों की ईसी की पुन: जांच नहीं होगी, उन्हें एक अप्रैल से बंद कर दिया जाएगा। हालांकि अब इसकी संभावना कम है। केंद्र सरकार की ओर से गठित प्राधिकरण का कार्यकाल तीन साल का होगा। इसमें अध्यक्ष वन विभाग के पू्र्व हॉफ मुनीश कुमार गर्ग, सदस्य मनफूल सिंह और सदस्य सचिव पर्यावरण विभाग, राजस्थान सरकार के सचिव को बनाया गया है।


