सरकार ने 7 विभागों में सालों से खाली पड़े अलग-अलग 56720 पदों को भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सबसे बड़ी भर्ती निकाली है, वहीं राजधानी के विकास की जिम्मेदारी वाले जेडीए में 1932 पदों में से 1264 पद सालों से खाली हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के जरिए 26 साल से एक भी पद नहीं भरा गया। तहसीलदार से लेकर बाबू तक के लिए पद डेपुटेशन के भरोसे हैं। 42 साल पहले वजूद में आए जेडीए में केवल 256 स्थायी अधिकारी-कर्मचारी बचे हैं। तहसीलदार से लेकर बाबू तक करीब 429 पद डेपुटेशन से भरे हैं। पदों पर स्थायी कर्मचारी नहीं होने और कर्मचारियों की संख्या कम होने से आमजन को मकान के पट्टे, नाम ट्रांसफर जैसे छोटे-छोटे काम के लिए महीनों तक भटकना पड़ता है। प्रशासनिक शाखा में 75 फीसदी पद खाली : शहर के सुनियोजित के लिए जेडीए ने प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर आईटी सेल तक आठ विंग बना रखी है, लेकिन एक भी विंग में स्थायी कर्मचारी नहीं है। मुख्य प्रशासनिक विंग में 75 फीसदी तक पद खाली पड़े हैं। इसमें एक हजार पद खाली हैं, केवल 247 पदों पर ही अधिकारी-कर्मचारी नियुक्त हैं। इनमें से 163 अधिकारी कर्मचारी स्थायी है, 86 पदों पर डेपुटेशन पर लगे हैं। इनमें 54 में से 25 तहसीलदार, 73 में से 41 पटवारी अमीन राजस्व विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। डेपुटेशन के साइड इफेक्ट; रिश्वतकांड में पकड़े 5 अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर थे जेडीए में 4 महीने पहले रिश्वत कांड में पकड़े गए 6 से 5 अधिकारी कर्मचारी राजस्व विभाग से जेडीए में प्रतिनियुक्ति पर लगे थे। एसीबी ने लैंड यूज चेंज के नाम पर तहसीलदार, जेईएनएन, गिरदावर, पटवारी को घूस लेते हुए पकड़ा था। रिश्वत कांड के बाद डेपुटेशन पर एक दर्जन से अधिक कार्मिकों को जेडीए से कार्यमुक्त कर मूल विभाग भेजा था। सालों से भर्ती नहीं होने से जेडीए में राजस्व विभाग, बिजली विभाग, पुलिस, वन विभाग, यूडीएच से प्रतिनियुक्ति पर मलाईदार पदों पर लगे हैं। नियम: डेपुटेशन पर 4 साल से ज्यादा नहीं लगाया जाए, लेकिन यहां आठ साल से जमे हैं : किसी भी अधिकारी कर्मचारी को डेपुटेशन के लिए किसी विभाग में न्यूनतम एक साल और अधिकतम 4 साल के लिए नियुक्ति दी जाती है, लेकिन जेडीए में पटवारी, अमीन, तहसीलदार, जेईएएन, एक्सईएन, एटीपी, सहायक लेखाधिकारी, जूनियर अकाउंटेंट, लीगल अॉफिसर के पदों पर 150 पदों पर अधिकारी सालों से जमे हैं। अधिकारी-कर्मचारियों की कमी से आमजन के काम प्रभावित जेडीए का दायरा 3 हजार वर्गकिमी शिवदासपुरा से चंदवाजी, बस्सी से बगरू तक फैला है। आमजन को पट्टे, नाम ट्रांसफर, 90ए, लैंड यूज चेंज, जमीन आवंटन, नई कॉलोनियां डवलप करने, अनुमोदित करने के लिए 18 जोन में बांटा गया है, लेकिन तहसीलदार, पटवारी, जेईएन सहित 1264 पद खाली हैं। जेडीए अधिकारी कर्मचारी परिषद अध्यक्ष बाबूलाल मीना का कहना है कि 26 साल से जेडीए में कोई स्थायी भर्ती नहीं हुई। जेडीए सेवा से केवल 12 फीसदी स्थायी कर्मचारी लगे हैं। 65 फीसदी पद खाली हैं, इससे आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारी परिषद ने राज्य सरकार से जल्द भी भर्ती प्रक्रिया कर खाली पदों को भरने की मांग की है। जेडीए में जूनियर असिस्टेंट के 310 पद स्वीकृत केवल 35 पद भरे हैं प्रशासनिक शाखा ने जूनियर असिस्टेंट के 310 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 35 जूनियर असिस्टेंट लगे हैं। 275 पद खाली पड़े हैं, इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के 265 में से 235 पद खाली हैं। ये दोनों पद ठेके पर लगे गार्ड के भरोसे चल रहे हैं। खाली पदों के मुकाबले 10% पदों की भर्ती का प्रस्ताव भेजा : जेडीए में 1264 यानि कुल स्वीकृत पद 1932 के मुकाबले 65 फीसदी पोस्ट खाली पड़े हैं। जेडीए ने हाल में आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड को केवल 110 पदों की भर्ती का प्रस्ताव भेजा है। इनमें कनिष्ठ लेखाकार के 15, कनिष्ठ सहायक के 75, स्टेनोग्राफर के 10 और कनिष्ठ विधि अधिकारी के 10 पदों के भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजा है। प्रतिनियुक्ति के भरोसे जेडीए: 256 स्थायी अधिकारी-कर्मचारी, अभी भी 429 पदों पर डेपुटेशन से लगे हैं डेपुटेशन खत्म करने का दावा: झाबर सिंह खर्रा ने मंत्री बनने के बाद रिव्यू बैठक लेकर कहा था कि डवलपमेंट अथॉरिटी, निगम व पालिकाओं से डेपुटेशन खत्म कर भर्ती से पद भरे जाएंगे। हकीकत : जेडीए में 429 पद डेपुटेशन पर चल रहे हैं। अब यूडीएच विभाग ने नगर पालिकाओं में प्रशासनिक, तकनीकी, अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक कर्मचारियाें के 4 हजार खाली पदाें पर स्थायी भर्ती की बजाय अन्य विभागाें से डेपुटेशन और संविदा पर भरने का नाेटिफिकेशन जारी किया है। इसका सर्कुलर जारी कर दिया है। ट्रांसफर बैन हाेने से दूर दराज लगे अधिकारी कर्मचारी डेपुटेशन मनचाही जगहों पर लगेंगे।


