कलेक्टर-कमिश्नर काॅन्फ्रेंस में होगी ​​​​​​​पेसा एक्ट क्रियान्वयन की समीक्षा:मुख्यमंत्री बोले- पेसा सेल गठित कर तेजी से कराएं दावों का निराकरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर कमिश्नर-कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में लागू पेसा कानून में पेश किए गए दावों के निराकरण की समीक्षा की जाएगी। इसलिए इसके निराकरण का काम तेजी से किया जाए। उन्होंने पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए जनजातीय कार्य विभाग में पेसा सेल गठित करने पर सहमति प्रदान की। पेसा कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक के दौरान सीएम यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेंदू पत्ते का बड़ा उत्पादक है लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग अन्य राज्यों में होता है। तेंदूपत्ता संग्राहकों और इससे जुड़े विभिन्न व्यवसायों को प्रदेश में ही प्रोत्साहित करने एवं आदिवासियों को इसके लाभ दिलाने के लिए रणनीति बनाई जाए। रिकार्ड ऑफ राइट्स शीघ्र प्रदान करें वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स की कार्यकारी समिति की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने के लिए राज्य शासन के नोटिफिकेशन अनुसार ग्रामवासियों को रिकार्ड ऑफ राइट्स शीघ्र प्रदान किए जाएं। प्रदेश में 925 वन ग्रामों में से 827 को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। इनमें से 792 को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित कर अब तक 790 ग्रामों का गजट नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है। खाद की समीक्षा बैठक में बोले सीएम, जैविक खाद को बढ़ावा देने का मॉडल विकसित करें इसके पहले प्रदेश में खाद की उपलब्धता को लेकर बुलाई गई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जैविक खाद के उपयोग को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का मॉडल विकसित किया जाए। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए जैविक तथा प्राकृतिक खाद जैसे विकल्प किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में फसलों की बोनी लगभग 97 प्रतिशत है। वर्तमान वर्ष में यूरिया, एनपीके, एसएसपी और एमओपी खाद की उपलब्धता गत चार वर्षों में सर्वाधिक है। वर्तमान तक उपलब्ध 35 लाख 68 हजार मीट्रिक टन में से 32 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का वितरण हो चुका है। इसी प्रकार 9 लाख 29 हजार मीट्रिक टन एनपीके, 10 लाख 58 हजार मीट्रिक टन एसएसपी, 91 हजार मीट्रिक टन एमओपी वितरित हो चुका है। इसी प्रकार 10 लाख 82 मीट्रिक टन डीएपी और 20 लाख 11 हजार मीट्रिक टन डीएपी एनपीके वितरित किया जा चुका है।

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