झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजरिया की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले से डीजीपी अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली है। कपिल सिब्बल ने रखा सरकार का पक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने झारखंड सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि डीजीपी की नियुक्ति पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने तर्क दिया कि अनुराग गुप्ता को सभी नियमों का पालन करते हुए डीजीपी बनाया गया है। अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। बाबूलाल मरांडी ने उठाए थे सवाल गौरतलब है कि बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याचिका में मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया था। मरांडी का कहना था कि नियुक्ति प्रक्रिया प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीएससी पैनल से चुने गए डीजीपी को हटाकर अनुराग गुप्ता को गलत तरीके से नियुक्त किया गया। DGP नियुक्ति में केंद्र और राज्य आमने-सामने डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव लगातार जारी है। अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल को 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले थे। राज्य सरकार ने उनके कार्यकाल के विस्तार के लिए केंद्र को पत्र भेजा, लेकिन केंद्र ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। केंद्र का स्पष्ट कहना है कि गुप्ता की सेवा 30 अप्रैल को ही समाप्त हो गई। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें डीजीपी पद पर बनाए रखा है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की नियुक्ति नियमावली को नियम विरुद्ध करार देते हुए सेवा विस्तार को असंवैधानिक बताया है। लेकिन झारखंड सरकार अपने रुख पर कायम है और गुप्ता की नियुक्ति को वैध ठहरा रही है।


