साय कैबिनेट विस्तार में पीढ़ी परिवर्तन चुनावी समीकरण:गजेंद्र- खुशवंत-राजेश को जातीय-सामाजिक समीकरण से मिली कुर्सी, प्रदेश कैबिनेट में बिहार चुनाव इफेक्ट

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल का विस्तार बुधवार को होगा। दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव, आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब और अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल ने मंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी ने साय कैबिनेट में इन तीन विधायको को मंत्री बनाकर जातीय और सामाजिक समीकरण को साधा है। साय कैबिनेट में यादव (ओबीसी), सतनामी (एससी) और वैश्य समाज से प्रतिनिधित्व जोड़ा गया है। साय कैबिनेट में इस प्रतिनिधित्व के जुड़ने पर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों और रिटायर्ड अफसरों का कहना है, कि बीजेपी ने कैबिनेट विस्तार पीढ़ी बदलने और बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर किया है। आगामी चुनावों में इसका फायदा बीजेपी को मिलेगा। अब पढ़े MLA गजेंद्र यादव के मंत्री बनने के पीछे का समीकरण भाजपा ने दुर्ग शहर से विधायक गजेंद्र यादव को मंत्री बनाने का फैसला किया है। उनकी पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी है और वे प्रांत संघचालक बिसराराम यादव के पुत्र हैं। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ में यादव समाज को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा सीधे बिहार पर नजर गड़ाए है। बिहार की 2023 जातिगत गणना में यादवों की आबादी 14.26 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसलिए भाजपा चाहती है कि राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाए कि पार्टी यादव समाज को सत्ता में भागीदारी दे रही है। अब पढ़े MLA खुशवंत साहेब के मंत्री बनने के पीछे का समीकरण आरंग से विधायक गुरु खुशवंत साहेब सतनामी समाज के प्रभावशाली चेहरा हैं। संत गुरु बालदास के उत्तराधिकारी होने के नाते उनका सीधा प्रभाव वोट बैंक पर पड़ता है। 2013 में बालदास के समर्थन से भाजपा को फायदा हुआ था, जबकि 2018 में कांग्रेस का समर्थन करने से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा। अब खुशवंत को मंत्री बनाकर भाजपा एससी समाज को मजबूती से साधना चाहती है। अब पढ़े MLA राजेश अग्रवाल के मंत्री बनने के पीछे का समीकरण अंबिकापुर से विधायक राजेश अग्रवाल कांग्रेस के दिग्गज टी.एस. सिंहदेव को हराकर सुर्खियों में आए। वे वैश्य समाज से आते हैं। रायपुर सांसद बनने के बाद बृजमोहन अग्रवाल के मंत्री पद से हटने से इस वर्ग का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया था। अब राजेश को मंत्री बनाकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि व्यापारी समाज को सत्ता में अहमियत मिलेगी। आपको बता दे, कि MLA राजेश अग्रवाल के अलावा, वैश्य समाज MLA अमर अग्रवाल, MLA राजेश मूणत भी आते है। लेकिन भाजपा ने पहली बार विधायक बने राजेश अग्रवाल को मंत्री बनाकर पीढ़ी बदलने का मैसेज दिया है। अब पढ़े साय कैबिनेट में प्रदेशीय समीकरण और मंत्रियों का बंटवारा साय मंत्रिमंडल में पहले से 11 मंत्री हैं। अब तीन नए चेहरों के जुड़ने से कुल संख्या 14 हो जाएगी। यह पहली बार होगा जब छत्तीसगढ़ में 14 मंत्री होंगे, जबकि अब तक 90 सीटों वाली विधानसभा में 15 प्रतिशत नियम के तहत अधिकतम 13 मंत्री ही बनते रहे। संभागवार देखा जाए तो सरगुजा संभाग से 4, बिलासपुर से 3, दुर्ग से अब 3, रायपुर और बस्तर से 1-1 मंत्री हैं। इस वजह से दिग्गज हुए दरकिनार पार्टी ने इस विस्तार में पुराने दिग्गजों को दरकिनार कर नई पीढ़ी को मौका दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार कर रही है। – पुन्नूलाल मोहिले: छह बार विधायक और चार बार सांसद रहे। 2008 से 2018 तक खाद्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। बीजेपी के परिवर्तन नियम के के कारण कैबिनेट में जगह नहीं बना पाए। अमर अग्रवाल: लगातार पांच बार विधायक बने। वित्त, वाणिज्य, आबकारी और स्वास्थ्य मंत्री रहे। कैबिनेट में शामिल होने के लिए अंतिम दिन तक जोर लगाते रहे। राजेश अग्रवाल की एंट्री से बाहर का रास्ता देखने पड़ा। – अजय चंद्राकर: कुरूद से पांच बार विधायक चुने गए। शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व किया। दिल्ली तक एप्रोच लगवाई, लेकिन जातिगत समीकरण में पिछड गए और कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए। – राजेश मूणत: रायपुर पश्चिम से चार बार विधायक बने। 15 साल तक लोक निर्माण और नगरीय प्रशासन मंत्री रहे। कैबिनेट मंत्री बनने की रेस में थे, लेकिन राजेश अग्रवाल के तिलिस्म को तोड़ नहीं पाए। – लता उसेंडी: तीन बार विधायक रहीं। महिला एवं बाल विकास मंत्री का कार्यभार संभाला। कैबिनेट में एंट्री मिले इसलिए सीएम हाउस से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगाई, लेकिन मंत्री मंडल में पहले से ही एक महिला मंत्री है, इस वजह से एंट्री नहीं मिल पाई। विक्रम उसेंडी: चार बार विधायक और प्रदेशाध्यक्ष रहे। वन, शिक्षा और आईटी मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। बीजेपी के परिवर्तन नियम के कारण मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिली। धरमलाल कौशिक: चार बार विधायक बने। विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रहे। जातिगत समीकरण और पीढ़ी परिवर्तन नियम के कारण कैबिनेट में जगह नहीं मिली।

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