छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आंदोलन के तीसरे दिन मंगलवार को बिलासपुर में कर्मचारियों ने सरकार को “सद्बुद्धि देने के लिए हवन-यज्ञ” किया। मंत्रोच्चारण और अग्निहोत्र के बीच कर्मचारियों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए सरकार से मांगों को पूरा करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से संविदा पर कार्यरत हैं, लेकिन अभी तक नियमित नहीं किए गए। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा शर्तों का निर्धारण, स्थानांतरण नीति और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत मांगों को लेकर आवाज उठाई है। हवन के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि प्रदेश की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था और आम जनता के हक की लड़ाई है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा और आगे और उग्र रूप ले सकता है। कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हड़ताल का असर जिला अस्पताल, CIMS, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में साफ देखा जा रहा है। ओपीडी, टीकाकरण, प्रसव सेवाएं, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, मलेरिया-टीबी जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सरकार से फिर अपील संघ ने जिले स्तर पर नई कार्यकारिणी का गठन कर आंदोलन को संगठित रूप देने की कोशिश शुरू कर दी है। पदाधिकारियों ने सरकार से एक बार फिर अपील की है कि कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा।


