झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सहायक आचार्य शिक्षक (कक्षा 6 से 8) नियुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने प्रार्थी राजेश मिस्त्री की ओर से दी गई दलील सुनी। अदालत ने कहा कि यदि विज्ञापन और नियमावली में टकराव हो तो नियमावली ही प्रभावी मानी जाएगी। इसके बाद अदालत ने प्रार्थी के लिए सामाजिक विज्ञान विषय के तहत पारा शिक्षक श्रेणी में एक पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने जेएसएससी को इस मामले में छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इससे पहले प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि जेएसएससी ने नियुक्ति विज्ञापन में एक शर्त लगाई है कि स्नातक स्तर पर सामाजिक विज्ञान संबंधित विषय को लगातार तीन वर्षों तक पढ़ना अनिवार्य होगा। जबकि झारखंड प्राइमरी स्कूल असिस्टेंट टीचर (सहायक आचार्य) कैडर नियमावली, 2022 के अनुसार संबंधित विषय में केवल स्नातक की डिग्री ही पर्याप्त है। प्रार्थी का कहना है कि यह अतिरिक्त शर्त पूरी तरह नियम विरुद्ध है। ऐसे में प्रार्थी को राहत मिलनी चाहिए। सुनवाई के बाद अदालत ने जेएसएससी को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने और प्रार्थी के लिए पारा श्रेणी में पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए एक एसओपी बनाई गया है। एसओपी को मंजूरी के लिए संबंधित विभाग को भेजा गया है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे राज्यभर में लागू किया जाएगा। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद में अलग से कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी जो भी शिकायतें आएंगी उसे दर्ज करते हुए संबंधित थाने को भेजा जाएगा। थाना स्तर से इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। महाधिवक्ता ने बताया कि इसमें कुछ समय लगेगा। उन्होंने अदालत से समय देने का आग्रह किया। अदालत ने आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की है। मालूम हो कि पूर्व में हाईकोर्ट ने सरकार को ध्वनि प्रदूषण पर रोक के लिए एसओपी बनाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने गृह सचिव को इस मामले में प्रतिवादी बनाते हुए रात दस बजे के बाद ध्वनि प्रदूषण पर रोक के लिए एसओपी बना कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि त्योहार पर राज्य के जिलों में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए सरकार एसओपी बना कर उसे लागू कराए। विशेष संवाददाता | रांची झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को राज्य के सभी जिलों में फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार और जेपीएससी से प्रगति रिपोर्ट मांगी है। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में सितंबर 2024 में ही सरकार और जेपीएससी की ओर से शपथ-पत्र दाखिल कर बताया गया था कि जल्द ही नियुक्ति कर ली जाएगी। लेकिन नियुक्ति हुई या नहीं, इसकी जानकारी भी कोर्ट को नहीं दी गई। पूर्व में सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि जेपीएससी के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर ली गई है। जल्द ही नियुक्ति का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया जाएगा। मालूम हो कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर मीडिया रिपोर्ट पर हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने सरकार को सभी जिलों में फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। सरकार की ओर से शपथपत्र दाखिल कर बताया गया था कि जेपीएससी का अध्यक्ष पद रिक्त रहने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है। नियुक्ति होते ही फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। लेकिन अभी तक फूड सेफ्टी अफसर बहाल नहीं हुए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मिलावटी खोआ-पनीर बड़े पैमाने पर बिक रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से सिर्फ त्योहार के समय ही कार्रवाई की जाती है।


