बलरामपुर में डायरिया से पंडो महिला की मौत, चार पीड़ित:CMHO के साथ स्वास्थ्य अमला गांव में पहुंचा, चार को हॉस्पिटल में किया गया दाखिल

बलरामपुर के पंडो बाहुल्य बेबदी गांव में डायरिया से पीड़ित एक महिला की मौत हो गई। सूचना पर स्वास्थ्य अमले ने गांव में कैंप लगा पीड़ितों की जांच की। चार पीड़ितों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाड्रफनगर एवं बलंगी में भर्ती किया गया है। मृतक एवं पीड़ित एक ही परिवार के हैं। घटना की सूचना पर बलरामपुर सीएमएचओ डा. बसंत सिंह गांव में पहुंचे। सीएमएचओ ने शनिवार से गांव में कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, वाड्रफनगर ब्लॉक के बेबदी गांव में निवासरत पंडो परिवार में 15 अगस्त से डायरिया फैला हुआ है। डायरिया पीड़ित एक पंडो महिला लीलावती पति सूरजमल (35 वर्ष) की शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे मौत मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि लीलावती को उल्टी-दस्त की शुरुआत गुरुवार से हुई थी, लेकिन ज्यादा उल्टी-दस्त के कारण रात में उसके हाथ-पैर में खिंचाव होने लगा। सुबह उसने दम तोड़ दिया। चार पीड़ितों को पहुंचाया हॉस्पिटल
मामले की सूचना पर स्वास्थ्य अमला गांव में पहुंचा। अमले ने डायरिया पीड़ित जुगमनिया पति रामलाल (36 वर्ष) एवं बिफिया पति रामशरण (28 वर्ष) से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाड्रफनगर में भर्ती कराया। अन्य दो पीड़ितों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलंगी में दाखिल किया गया है। गांव में अन्य डायरिया पीड़ितों की जानकारी ली जा रही है। CMHO पहुंचे, कल से गांव में लगेगा कैंप
मामले की सूचना मिलने पर CMHO डा. बसंत सिंह बेबदी पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों से बात की। मृतका के परिवार के सदस्यों ने बताया कि 15 अगस्त से परिवार के सदस्य उल्टी-दस्त से पीड़ित हो रहे थे। CMHO डा. बसंत सिंह ने बताया कि डायरिया का प्रकोप एक ही परिवार में फैलने की बात सामने आई है। उन्होंने क्या खाया था, इसकी भी जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों को उबला पानी पीने की सलाह दी गई है। एहतियातन गांव में शनिवार से स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मी गांव में अन्य लोगों की भी जांच करेंगे। यदि कोई उल्टी-दस्त पीड़ित मिला तो उसे स्वास्थ्य कैंप या केंद्र में उपचार के लिए दाखिल किया जाएगा। डायरिया के लिए संवेदनशील है क्षेत्र
वाड्रफनगर का यह इलाका डायरिया के लिए अति संवेदनशील है। दो दशक पूर्व तक यहां हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत डायरिया के कारण होती थी। अब स्थितियां सुधरी हैं। डायरिया को लेकर लोगों में जागरूकता भी आई है एवं ढोढ़ी व नाले का पानी पीने के बजाय हैंडपंप का पानी लोग पी रहे हैं।

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