झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को जलस्त्रोतों के अतिक्रमण मामले पर स्वत: संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव आैर जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए इस मामले में राज्य सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगी। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने के लिए बनी टास्क फोर्स ने अब तक क्या कार्रवाई की है। कितने जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और उनके संरक्षण के लिए कौन-कौन कदम उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य के 14 जिलों में जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने के लिए टास्क फोर्स बनाई गई है। उसकी रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। रिपोर्ट जमा करने के लिए समय की मांग की गई। अदालत ने राज्य सरकार को सभी जिलों के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए बनाई गई टास्क फोर्स की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। रांची नगर निगम को बड़ा तालाब के लिए आवंटित बजट, तालाब की सफाई के लिए अब तक किए गए कार्य, टेक्निकल एक्सपर्ट से ली गई सहायता की पूरी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ई-बॉल डालने के बाद भी नहीं साफ हुआ पानी, रंग अभी भी हरा है। बड़ा तालाब को साफ रखने के लिए अभी तक 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। तालाब के किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और किनारे में नाली बनाई गई है। नाले के पानी को साफ करके तालाब में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा तालाब के पानी को साफ करने के लिए ई-बॉल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। चरणबद्ध तरीके से ई-बॉल डाला जा रहा है। अभी तक 17 हजार से अधिक ई-बॉल तालाब में डाले गए, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। तालाब का पानी अभी भी कहीं पर काला तो कहीं हरे रंग का है। नजदीक जाने पर पानी से दुर्गंध भी आ रही है। बड़ा तालाब से फिर उठने लगी दुर्गंध, सफाई में अब तक खर्च हो चुके 10 करोड़ ई-बॉल डालने से साफ नहीं हुआ बड़ा तालाब का पानी


