मोबाइल बना दोस्त, नतीजा-लोगों से जुड़ना पसंद नहीं कर रहे

बच्चों का बचपना तेजी से खो रहा है। खुले मैदानों में दौड़ना, मिट्टी में खेलना, दोस्तों के साथ हंसी-ठिठोली करना तो जैसे वे भूल ही चुके हैं। 90% बच्चे आज इस डर में हैं कि दूसरे क्या सोचेंगे। नतीजा यह है कि वे लोगों से जुड़ना पसंद नहीं कर रहे। मोबाइल को ही उन्होंने अपना दोस्त मान लिया है। यह जानकारी अलग-अलग स्कूलों में चल रहे काउंसलिंग सेशन में आई है। नई शिक्षा नीति में छात्रों के समग्र विकास व उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए पेशेवर परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके तहत शहर के स्कूलों में काउंसलर की व्यवस्था की गई है। बच्चे रोजाना काउंसलर के पास पहुंच रहे हैं। दैनिक भास्कर ने शहर के 25 स्कूलों के काउंसलर से बात की व बच्चों की समस्याओं के बारे में जाना। पता चला कि बच्चे आजकल खुद में इतने खोए हैं कि बाकी चीजों के लिए वक्त ही नहीं निकाल पा रहे है। पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे है। दूसरे क्या सोचेंगे इस बात की बहुत ज्यादा फिक्र है। गोल इतने बड़े-बड़े सेट कर लिए हैं कि उसे कैसे पूरा करें और अगर पूरा नहीं किया तब क्या होगा इस सोच से जूझ रहे हैं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट: बच्चों से बातें करें, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें किस कक्षा वर्ग के बच्चों में कैसा परिवर्तन क्लास समस्या 1 से 3 मोबाइल फोन एडिक्शन ज्यादा, जिद-गुस्सा करते हैं, काउंसलर के पास नहीं आते, काउंसलर ही उनके पास जाकर बात करते हैं। 4 से 5 अटेंशन डिफिशिएंसी सिंड्रोम, घर में भाई-बहन के सामने अटेंशन पाने के लिए कई तरह की तरकीबें अपनाते है। घर की बदमाशी स्कूल में दुहराते हैं। 6 से 7 अपने से बड़े लोगों को कॉपी करते हैं, अनुशासन की बहुत ज्यादा कमी होती है, बहुत कुछ नया सीख रहे होते हैं। 8 से 9 छात्र पढ़ाई और सोशल लाइफ को बैलेंस करना सीख रहे होते हैं, बच्चों को लगता है कि माता-पिता उन्हें समझ नहीं रहे हैं। 10 बच्चे रिजल्ट, परिवार, पड़ोसी से घिरे होते हैं, सेल्फ डाउट बहुत ज्यादा होता है, व्यवहार में बदलाव आता है, फ्रस्ट्रेशन में रहते हैं। 11 से 12 गोल सेट कर रहे होते हैं, चाहते हैं कि सब कुछ आसानी से मिल जाए, गेमिंग जैसी चीजों का एडिक्शन होता है। 90% बच्चों में दूसरे क्या सोचेंगे इस बात का डर… काउंसलर ने बताया… समय प्रबंधन नहीं कर पा रहे बच्चे लोकल सोना चांदी भाव शहर में आज तापमान / मौसम कारण: माता-पिता को समाज का डर, यह डर बच्चों में आ गया है। बच्चों में समाया दूसरे क्या सोचेंगे इसका डर कारण: आत्मविश्वास में कमी, सिर्फ दोस्तों से बात करना पसंद। बच्चे बने संकोची, बात से कतरा रहे कारण: बच्चे सोशल मीडिया में व्यस्त, मां-बाप काम में, आया कम्यूनिकेशन गैप। कारण: ध्यान में भटकाव, अन्य गतिविधियों में मन लगता है। बच्चों की कमजोरी बच्चों की बड़ी परेशानी कारण: सोशल मीडिया पर ध्यान, कोचिंग-ट्यूशन में जा रहा समय। बच्चे नहीं कर पा रहे लोगों से बातें करने में मां-बाप नहीं समझते पढ़ाई में ध्यान नहीं समय प्रबंधन

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