पारंपरिक कीर्तन शैली व तंती साजों की शिक्षा का केंद्र बनी जवद्दी टकसाल, समागम में जुड़ी संगत

भास्कर न्यूज| लुधियाना जवद्दी टकसाल के संस्थापक और शिरोमणि गुरमत संगीत प्रचारक, सचखंडवासी संत बाबा सुच्चा सिंह जी की 23वीं पुण्यतिथि पर गुरुद्वारा गुर ज्ञान प्रकाश, जवद्दी टकसाल में भव्य संत समागम हुआ। इसमें देशभर से धार्मिक हस्तियां, विभिन्न संप्रदायों के संत-महापुरुष, निहंग जत्थे और भारी संख्या में संगत शामिल हुई। समागम का आयोजन संत बाबा अमीर सिंह जी की देखरेख में हुआ। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि संत बाबा सुच्चा सिंह जी ने सिख धर्म के प्रचार-प्रसार और गुरमत संगीत की परंपरा को जीवंत रखने के लिए मिसाली सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा स्थापित जवद्दी टकसाल आज पारंपरिक कीर्तन शैली और तंती साजों की शिक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। उन्होंने यह भी कहा कि संत बाबा अमीर सिंह जी ने जिस समर्पण और दूरदर्शिता से इस विरासत को आगे बढ़ाया है, उसके चलते जवद्दी टकसाल पूरे पंथ में गुरमत संगीत की धुरी बन चुकी है। समागम में बड़ी संख्या में संत-महापुरुष और विद्वान शामिल हुए। इनमें संत बाबा बलबीर सिंह (मुखी 96 करोड़ी बुढ़ा दल), जत्थेदार निहाल सिंह (मिसल शहीदां हरीं वेलां), जत्थेदार गुरदेव सिंह, संत बाबा अवतार सिंह (दल पंथ सुर सिंह वाले), संत बाबा नरेन्द्र सिंह (लंगरां वाले, श्री हजूर साहिब नांदेड़), संत बाबा तेजा सिंह (खुडा कुराला), बाबा मेजर सिंह (पंज भैणियां वाले), ज्ञानी सुखजीत सिंह घण्या, ज्ञानी सूबा सिंह, संत बाबा हरी सिंह (जीरा), संत भूपिंदर सिंह और प्रसिद्ध विद्वान ज्ञानी जसवंत सिंह परवाना शामिल थे। सभी ने संगत को गुरमत विचार साझा किए और संत बाबा सुचा सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा समागम में संत बाबा अवतार सिंह (साधांवाले), संत बाबा गुरनाम सिंह (डरोली भाई के), बाबा प्रताप सिंह (मांडी वाले), संत बाबा सेवा सिंह (रामपुर खेड़ा), उनके सेवक संत बाबा सेवा सिंह (खंडूर साहिब), संत बाबा अनहदराज सिंह (नानकसर समराला चौक), स्वामी शाता नंद (जालंधर) के प्रतिनिधि ज्ञानी हरदीप सिंह, संत बाबा रंजीत सिंह, संत बाबा मेहर सिंह, बाबा सुलक्षण सिंह, बाबा बलदेव सिंह, बाबा तेजवीर सिंह, संत बाबा दलजीत सिंह, संत गुरमीत सिंह, संत बाबा लीडर सिंह, ज्ञानी अतर सिंह (हेड ग्रंथी, श्री जोती सरूप साहिब), महंत प्रितपाल सिंह, बाबा रंजीत सिंह (सेवा पंथी संप्रदा), माता विपनप्रीत कौर, बीबी जसप्रीत कौर, ज्ञानी बलविंदर सिंह (हेड ग्रंथी, श्री मंजी साहिब, आलमगीर), भाई मेजर सिंह खालसा, अमरजीत सिंह चावला, गुरमत सिंह कुलार और रंजीत सिंह ढिल्लों ने भी शिरकत की। टकसाल की ओर से समागम में पहुंचे सभी महानुभावों को सिरोपाओ, लोहियां और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संगत ने पूरे श्रद्धाभाव से संत बाबा सुचा सिंह जी को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया। यह समागम न सिर्फ श्रद्धांजलि का अवसर रहा, बल्कि गुरमत विचारधारा और पारंपरिक कीर्तन शैली को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया। जवद्दी टकसाल में हुए समागम के दौरान मौजूद संगत।

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