आंखों में आंसू, दिलों में दर्द कैंपों में ही मिल रही राहत

अमनदीप सिंह | अमृतसर रावी नदी का बांध टूटते ही मानो जिंदगी थम गई। सैंकड़ों लोग पलभर में बेघर हो गए। जिन घरों में रौशनी और हंसी थी, वहां अब पानी और अंधेरे का छाया है। लोग अपना सबकुछ छोड़कर भागे कुछ की जमीनें रह गईं, तो कुछ का घरेलू सामान, बच्चों की किताबें और दवाइयां तक पानी में डूब गईं। कई परिवार अब राहत शिविरों में मजबूरी का जीवन जी रहे हैं। बाढ़ ने न सिर्फ घर उजाड़े हैं, बल्कि उम्मीदों को भी डुबो दिया है। बच्चे अपने खिलौनों और किताबों को ढूंढ रहे हैं, बुजुर्ग अपनी जिंदगी की जमा पूंजी पर रो रहे हैं और जवान अपने परिवारों को संभालने में टूट रहे हैं। कैंप में पहुंची रणजीत कौर ने बताया कि उनका बेटा जसकीरत खेलते-खेलते बोला ‘ मम्मी बाहर बहुत पानी आ रहा है।” वही रणजीत कौर ने बताया कि जब गेट पर जाकर देखा तो पानी उफान मार रहा था। उसी पल उन्होंने परिवार को बाहर निकाला। लेकिन आंखों के सामने घर में लहरें चढ़ती देखना उनके लिए किसी टूटन से कम नहीं। गुरु का बाग में बने कैंप में 2 फैमिली ही आई हैं। भला गांव और दाना मंडी में कैंपों में कोई भी नहीं। इसके लिए कैंप नंबर 1 में 25 से अधिक लोग दवा लेकर जा चुके हैं। वहीं फूड इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने कहा कि हेल्पलाइन नंबर पर कॉल आ रहे हैं। टीम गांव-गांव मदद पहुंचा रही है।

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