सुदूर देशों से आने वाले प्रवासियों पक्षियों में प्रमुख पेलिकन ने इस बार अजमेर से दूरी बना ली है। हर साल आनासागर और फॉयसागर झील में सैकड़ों की तादाद में आने वाले इस यूरोपियन पक्षी की आमद इस बार केवल आनासागर में हुई लेकिन तादाद महज कम है। प्रमुख झीलों पर चौंकाने वाली बात सामने आई कि इस बार फॉयसागर में एक भी पक्षी अब तक नहीं पहुंचा है। जबकि आनासागर में पेलिकन के अलावा गल और कॉमन कूट भी आए हैं। इन तीनों की ही संख्या कम है। वन विभाग की पक्षी गणना की पद्धति के आधार पर आनासागर में इन पक्षियों की गिनती की गई। आनासागर के चारों ओर कुल 48 ही पेलिकन नजर आए। इसके अलावा कॉमन कूट की संख्या 118 दर्ज की गई है। गल की संख्या भी इस बार कम है। फॉयसागर में इस बार एक भी प्रवासी परिंदा नहीं पहुंचा चौंकाने वाली बात है कि फॉयसागर में इस बार एक भी प्रवासी पक्षी नहीं पहुंचा है। यहां स्थानीय पक्षी भी नजर नहीं आए। डॉ. आबिद अली का कहना है कि ज्यादातर प्रवासी पक्षी अपने क्षेत्रों में बर्फ जमने से केवल सर्वाइव करने के मकसद से यहां आते हैं। भोजन-पानी पर्याप्त मात्रा में मिलने से यहां पिछली बार 350 से ज्यादा पेलिकन मौजूद थे। यह अक्टूबर के आखिर से ही आना शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार दिसंबर खत्म होने पर भी इनकी संख्या 50 तक ही मुश्किल से पहुंची है। कॉमन कूट भी पिछली बार 500 जबकि फॉयसागर में इनकी संख्या 1000 से ज्यादा थी। गल भी इस बार कम हैं। ब्रेड-टोस्ट पक्षियों के लिए हानिकारक आनासागर पर आने वाले लोग पक्षियों को रिझाने के लिए ब्रेड के बड़े-बड़े टुकड़े पानी में फेंक रहे हैं। यहां कुछ लोग अस्थायी दुकान ही लगाकर बैठे हैं। ब्रेड, आटे की गोलियां, दाने आदि बेच रहे हैं और पर्यटक खरीद कर पानी में फेंक रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है- इन पक्षियों को मछलियां पर्याप्त मात्रा में मिल रही है। जलीय जीवों को खाकर ही यह पक्षी विकास करते हैं। जबकि ब्रेड, टोस्ट, आटा, चना यह सब इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। पर्यटकों को जब यह सब खिलाने से रोका तो कहा बिक तो रही है, हम नहीं खिलाएंगे तो और कोई खिलाएगा।


