भिंड में बाजरा बेचने खरीदी केंद्र नहीं पहुंचे किसान:डेढ़ हजार किसानों ने कराया था रजिस्ट्रेशन; अफसरों ने समीक्षा रिपोर्ट में बताए तीन कारण

भिंड जिले में इस बार समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीदी को लेकर किसानों का विश्वास पूरी तरह से खत्म हो गया। जिले के 47 खरीदी केंद्रों पर बाजरा बेचने के लिए 1500 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 20 दिसंबर तक खरीदी की अंतिम तिथि तक एक भी किसान ने अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नहीं बेची। कृषि विभाग ने इस स्थिति पर समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खरीदी के लिए बनाए गए थे 47 केंद्र सरकार ने इस साल बाजरा, ज्वार और धान की खरीदी के लिए जिले में 47 केंद्र संचालित किए। इनमें से बाजरे के लिए 20, ज्वार के लिए 20 और धान के लिए 7 केंद्र थे। समर्थन मूल्य के तहत बाजरे के लिए 2625 रुपये, ज्वार के लिए 3421 रुपये और धान के लिए 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई। हालांकि, शुरुआती दिनों में कुछ किसान खरीदी केंद्रों पर पहुंचे, लेकिन उनकी फसल को अमानक बताकर लौटा दिया गया। किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया जटिल होने और उनकी फसल को बार-बार खारिज किए जाने से उनका भरोसा टूट गया। पिछले दो वर्षों से जिले में बाजरे की खरीदी नहीं हो रही है। पहले भी गुणवत्ता के मानकों में छूट देने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सरकार ने कोई रियायत नहीं दी। मंडी और समर्थन मूल्य में मामूली अंतर शुक्रवार को कृषि उपज मंडी में बाजरा 2551 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिका, जो समर्थन मूल्य 2625 रुपये से सिर्फ 74 रुपये कम था। इतने मामूली अंतर के कारण किसानों ने मंडी में ही फसल बेचना बेहतर समझा। समर्थन मूल्य पर बाजरा खरीदी के लिए बनाए गए केंद्र इस बार पूरी तरह विफल रहे। जटिल प्रक्रिया, भुगतान में देरी और बाजार मूल्य व समर्थन मूल्य के बीच मामूली अंतर ने किसानों को मंडी का रुख करने पर मजबूर किया। किसानों की खरीदी से दूरी के कारण समीक्षा रिपोर्ट में किसानों की खरीदी से दूरी के मुख्य कारण बताए गए हैं- किसान बोले-मंडी में तुरंत पैसा मिला किसान लालबहादुर सिंह ने कहा, “हमने समर्थन मूल्य पर बाजरा बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन मंडी में तुरंत पैसा मिल गया। अगर समर्थन मूल्य पर बेचते, तो भुगतान के लिए एक माह तक इंतजार करना पड़ता।” किसान राकेश सिंह ने कहा, “रजिस्ट्रेशन के लिए पटवारी के चक्कर काटे। जब समर्थन मूल्य और मंडी के भाव में ज्यादा अंतर नहीं है, तो मंडी में बेचना आसान और सुविधाजनक रहा।” अफसर बोले-कोई भी किसान नहीं आया जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी मनोज वार्ष्णेय ने बताया, “इस बार समर्थन मूल्य पर 1500 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 20 दिसंबर तक कोई भी किसान बाजरा बेचने नहीं आया।” कृषि विभाग के उप संचालक रामसुजान शर्मा ने कहा, “बाजार और समर्थन मूल्य में अंतर होने पर किसान खरीद केंद्र पर फसल बेचते हैं। जब यह अंतर नगण्य हो, तो किसान मंडी में फसल बेचना बेहतर समझते हैं। यही कारण है कि इस बार किसानों ने समर्थन मूल्य पर बाजरा नहीं बेचा।”

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