धान को खैरा से बचाने के लिए 10 दिन में दो बार जिंक सल्फेट डालें

गढ़वा | कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान अनुसार इस सप्ताह अधिकांश समय मौसम साफ रहेगा, परंतु बीच-बीच में बादल आते-जाते रहेंगे। कहीं छिट-पुट छीटें तो कहीं हल्की वर्षा का अनुमान है। दिन का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। वहीं रात का न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री रह सकता है। वातावरण में लगातार अधिक नमी बने रहने के कारण खरीफ फसलों में रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। जिसका ससमय प्रबंधन जरूरी है। धान में झुलसा रोग यानी ब्लास्ट का आक्रमण हो रहा है। जिसमें पत्तियों पर नाव के आकार के छोटे-छोटे भूरे धब्बे होते हैं और बीच का रंग राख के जैसा होता है। इसका प्रबंध नहीं करने पर यह बाली के निकले हिस्से में फैलता है। जिससे बालियां टूटने लगती है और उत्पादन काफी प्रभावित हो जाता है। इसके प्रबंधन हेतु कार्बेंडाजिम 2 ग्राम+इंडोफिल एम 45 का 1.25 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर 10 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें। यदि जीवाणु पत्ती झुलसा रोग यानी बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट का आक्रमण दिखे जिसमें पुआल के रंग के लहरदार धब्बे पत्तियों के एक या दोनों किनारों के सिरे से प्रारंभ होकर नीचे की ओर बढ़ते हैं और ऊपर से पत्तियां सूखने लगती हैं, तो किसी भी जीवाणुनाशक जैसे स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम प्रति 5 लीटर पानी के दर से घोलकर 10 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें। खैरा बीमारी जिसमें धान की पत्तियां लाल रंग यानी खैर के रंग की होने लगती है और बढ़वार रुक जाता है, तो 5 ग्राम जिंक सल्फेट+2.5 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर 7 से 10 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें। अरहर की फसल में उकठा रोग से बचाव हेतु फसल जब घुटने भर का हो जाए उस समय और उसके बाद एक-एक महीना के अंतराल पर और दो बार अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे कार्बेंडाजिम 2 से 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ के ऊपर वाले मिट्टी पर मोटा छिड़काव करें। मूंग, उड़द, बोदी, भिंडी, टमाटर, मिर्च जैसी फसलों में पत्ते पीले होने वाली बीमारी या कोंकड़ी लग रही हो तो संक्रमित पौधों को उखाड़ कर मिट्टी में दबा दें और इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन छिड़काव करें। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 7482098079 पर सिर्फ मैसेज करें। डॉ. अशोक कुमार कृषि वैज्ञानिक कृषि ​िवज्ञान केंद्र

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