प्रदेश में एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं शनिवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहीं। प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा, पिछले 50 वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकारी योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की अध्यक्ष ममता यादव के अनुसार उन्हें काम के समय सरकारी कर्मचारी और अधिकार मांगने पर मानसेवी कहा जाता है। 1975 में आईसीडीएस योजना की शुरुआत से देशभर में 27 लाख कार्यकर्ता-सहायिकाएं सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में केंद्र से कार्यकर्ताओं को 4500 रुपए और सहायिकाओं को 2250 रुपए मासिक मानदेय मिलता है। संघ की प्रमुख मांगों में कार्यकर्ताओं को तृतीय श्रेणी और सहायिकाओं को चतुर्थ श्रेणी का शासकीय कर्मचारी घोषित करना शामिल है। संघ ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी कार्यकर्ताओं के लिए 26,000 और सहायिकाओं के लिए 22,100 रुपए मासिक वेतन की मांग की जा रही है। साथ ही पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग भी की गई है। संघ ने 19 सितंबर को रायपुर में महासम्मेलन का आयोजन किया है। मांगें नहीं माने जाने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। अन्य मांगों में डिजिटल प्रणाली को बंद कर ऑफलाइन विकल्प, महंगाई भत्ता, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी और आकस्मिक मृत्यु पर परिजन को अनुकंपा नियुक्ति शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पूछा सवाल
संघ ने कहा है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है, ऐसे में जिम्मेदारी टालने का कोई रास्ता नहीं बचता। आंगनबाड़ी महिलाएं सिर्फ योजनाएं लागू करने वाली कार्यकर्ता नहीं, बल्कि समाज की रीढ़ हैं। अब वक्त आ गया है कि सरकार उनकी 50 साल की सेवा का सम्मान करें।


